हीरानगर,संवाद सहयोगी। जम्मू-कश्मीर में लगातार मौसम करवट बदल रहा है। कहीं बर्फबारी हो रही है, तो कहीं मूसलाधार बारिश हो रही है। कड़ाके की ठंड इंसानों को भले ही घरों में कैद रहने के लिए मजबूर कर रही है लेकिन फसलों के लिए ये वरदान साबित हो रही है। मंगलवार दोपहर से हो रही मूसलाधार वर्षा कंडी तथा सीमावर्ती क्षेत्र में लगी गेहूं के लिए वरदान साबित हुई है।

यह भी पढ़ें: Surgical Strike Row: दिग्विजय सिंह के बयान के खिलाफ शिवसेना डोगरा फ्रंट का प्रदर्शन, की बर्खास्तगी की मांग

खिले किसानों के चेहरे

फसल लगाने के बाद कोई जोरदार वर्षा नहीं होने की वजह से सिंचाई से कंडी तथा सीमावर्ती क्षेत्र में जहां सिंचाई के अभाव से गेहूं के पौधे सूख कर पीले हो गेए थे।अब तीन दिन के बाद दोबारा वर्षा पड़ने से गेहूं, सरसों मसूर,चना आदि फसलों में जान आ गई है।

खेतों में नमी कम होने की वजह से किसान ऊंची जगहों पर लगी फसल में युरिया खाद तथा खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कर पाए थे। लेकिन अब वर्षा से किसान काफी खुश हैं और फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों ने खाद का छिड़काव शुरू कर दिया है। अगर एक दो दिन तक इसी तरह वर्षा होती रही तो पौधों का विकास बढ़ने से उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

यह भी पढ़ें: Jammu Kashmir Weather: घाटी में मौसम ने ली करवट, बारिश और धुंध छाने से वैष्णो देवी हेलिकॉप्टर सेवा प्रभावित

यूरिया खाद की है कमी

किसानों का कहना है कि इस समय फसल को खाद की जरूरत है। मार्केट में यूरिया खाद की कमी की वजह से उन्हें मुश्किल हो रही है। वहीं कृषि विभाग के जोनल अधिकारी विनोद शर्मा का कहना है कि वर्षा से किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब किसान यूरिया खाद की दूसरी डोज का छिड़काव कर सकते हैं।

गौरतलब है कि हीरानगर उप मंडल में इस बार दस हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल लगी हुई है। अगर समय समय पर वर्षा होती रही तो फसलों का उत्पादन बढ़ने से किसानों को लाभ होगा।

Edited By: Swati Singh

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट