विश्व एड्स दिवस 2025: असुरक्षित यौन संबंध और नशा बढ़ा रहे मामले, जम्मू-कश्मीर में एक साल में 431 केस आए सामने
जम्मू-कश्मीर में एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद हर साल लगभग 400-500 नए मामले सामने आ रहे हैं। एंटी रेट्रोवायरल सेंटरों में इलाज कराने वालों की संख्या बढ़ी है और संक्रमण दर राष्ट्रीय औसत से कम है। युवाओं में असुरक्षित यौन संबंध और नशे के लिए एक ही सीरिंज का इस्तेमाल संक्रमण का मुख्य कारण है।
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विश्व एड्स दिवस 2025: असुरक्षित यौन संबंध और नशा बढ़ा रहे मामले। सांकेतिक फोटो
राेहित जंडियाल, जम्मू: एचआईवी एड्स को लेकर लोगों के बीच जागरूकता तो बढ़ी है लेकिन अभी भी मामले पहले की तरह ही दर्ज हो रहे हैं। इनमें कोई भी कमी नहीं आई है। हर वर्ष औसतन चार से पांच सौ नए लोगों में संक्रमण की पुष्टि होती है।
बदलाव सिर्फ इतना है कि अब एंटी रेटरो वायरल सेंटरों में पहले की अपेक्षा इलाज के लिए अधिक मरीज आ रहे हैं और इलाज की सुविधा भी बढ़ी है। यही नहीं जम्मू-कश्मीर में संक्रमण दर मात्र 0.06 है जो कि राष्ट्रीय स्तर से कम है।
जम्मू-कश्मीर एड्स नियंत्रण सोसायटी के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक एचआइवी संक्रमण के 431 नए मामले आए हैं। जम्मू-कश्मीर में इसके साथ ही संक्रमित मरीजों की संख्या 7126 हो गई है।
सबसे अधिक 5668 मरीज राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू के एंटी रेटररो वायरल सेंटर में दर्ज हैं। इसके बाद शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेस सौरा में 945 और राजकीय मेडिकल कालेज कठुआ में 513 मामले दर्ज हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार अभी तक जम्मू कश्मीर में 1668 मरीजों की माैत हो चुकी है। इनमें से 99 मौतें बीते एक वर्ष में हुई हैं। मरने वालों में 67 बच्चे शामिल हैं।
4139 मरीजों का चल रहा इलाज
जम्मू-कश्मीर के तीन एंटी रेटरो वायरल सेंटरों में 4139 मरीजों का इलाज चल रहा है। जीएमसी जम्मू के सेंटर में सबसे अधिक 3109 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेस के सेंटर में 945 और राजकीय मेडिकल कालेज कठुआ के सेंटर में 433 मरीजों का इलाज चल रहा है।
जीएमसी जम्मू में माइक्रोबायालोजी विभाग के एचओडी डा. संदीप डोगरा का कहना है कि बीते कुछ वर्ष में यह देखा गया है कि इलाज करवाने के लिए संक्रमित नियमित रूप से आ रहे हैं। एंटर रेटरो वायरल सेंटरों में इलाज की सभी सुविधाएं हैं। ऐसे में यह सकारात्मक बदलाव है।
हर महीने जीएमसी जम्मू में 15 से 20 मामले
जीएमसी जम्मू में हर महीने औसतन 600 के करीब संदिग्धों की जांच होती है। इनमें पंद्रह से बीस लोगों में एचआइवी संक्रमण की पुष्टि होती है। इनमें कालेजों व विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे बच्चे भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जेलों से भी मामले आते हैं।
जीएमसी जम्मू में एचओडी डा. संदीप डोगरा का कहना है कि युवाओं में असुरक्षित यौन संबंध तो एचआइवी संक्रमण का कारण थे ही। अब नशे के लिए एक ही सीरिंज का इस्तेमाल होना समस्या को और बढ़ा रहा है।
1986 में दर्ज हुआ था पहला मामला
जम्मू-कश्मीर में एचआइवी संक्रमण का पहला मामला वर्ष 1986 में दर्ज हुआ था।कश्मीर का एक व्यापारी जर्मनी से वापस आया था और उसमें एचआइवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद लगातार मामले दर्ज हुए हैं। कुछ वर्ष में मामले बढ़े हैं।
वर्ष 2019-20 में 361 मामले दर्ज हुए जबकि वर्ष 2020-21 में 206, वर्ष 2022-23 में 374, वर्ष 2023-24 में 338, वर्ष 2024-25 में 403 मामले दर्ज हुए हैं।
48 केंद्रों में हो रहा काम
जम्मू-कश्मीर एंड्स नियंत्रण सोसायटी वर्तमान में जम्मू और कश्मीर में 48 केंद्र संचालित करता है जिनमें 32 एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र, दो राज्य संदर्भ प्रयोगशालाएं, छह ओपियाड प्रतिस्थापन चिकित्सा केंद्र, तीन एआरटी केंद्र और पांच एसटीआई क्लीनिक शामिल हैं। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में परामर्शदाताओं, तकनीशियनों और नर्सों सहित 140 से अधिक कर्मचारी तैनात हैं।

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