जम्मू-कश्मीर में निजी प्रैक्टिस करने वाले मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों पर गिरेगी गाज? RTI कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता बलविंद्र सिंह ने जम्मू संभाग में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय देखभाल केंद्र की कमी और अन्य कमियों को उजागर किया।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। आरटीआई कार्यकर्ता बलविंद्र सिंह ने जम्मू संभाग में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चार नए मेडिकल कॉलेज स्थापित होने और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
जम्मू में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बलविंद्र सिंह ने कहा कि 17 नवंबर 2016 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए कहा था कि अब मरीजों को पीजीआई और एम्स जैसे संस्थानों में इलाज करवाने के लिए जाने की कोई जरूरत नहीं रहेगी। मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कई विभाग आज तक पूरी तरह से काम नहीं कर पाए। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय देखभाल के लिए समग्र केंद्र नहीं है। इमरजेंसी में मरीजों को जीएमसी में जाना पड़ता है। कइयों की इस कारण मौत हो जाती है।
उन्होंने कहा कि राजौरी, ऊधमपुर, डोडा और कठुआ में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद अभी भी इन कॉलेजों से जीएमसी जम्मू में मरीज रेफर होते हैं। उन्होंने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते रहते हैं और जूनियर डॉक्टरों को मरीज देखने के लिए लगा दिया जाता है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले संकाय सदस्यों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के साथ ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियक इमरजेंसी स्थापित करने की भी मांग की।
उन्होंने रेफर किए जाने वाले मरीजों को क्लीनिकल आडिट करने, एक मेडिकल कॉलेज से दूसरे मेडिकल कॉलेज में संकाय का तबादला करने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने से आए दिन मरीज परेशान हो रहे हैं।
इस मौके पर मंजीत सिंह बाली, अनिल नरगोत्रा, महिंदर शर्मा, महेश कोतवाल, मनमोहन सिंह, टीपी सिंह, हरमोहिंदर सिंह भी मौजूद रहे। सभी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू से इन मुद्दों का समाधान करने को कहा।
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