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कौन हैं रोहिंग्या और क्या होता है 'फॉरेनर्स एक्ट'? जिसके तहत रोहिंग्याओं को डिपोर्ट कर रहा जम्मू-कश्मीर

Published: Sun, 11 Oct 2026 02:35 PM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर में अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को फॉरेनर्स एक्ट के तहत म्यांमार डिपोर्ट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्यों की एंट्री कैसे हुई ये जानें।

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्यों की एंट्री कैसे हुई ये जानें।

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में अवैध रोहिंग्याओं का डिपोर्टेशन तेज

  2. फॉरेनर्स एक्ट के तहत हो रही है कानूनी कार्रवाई

  3. रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य के अल्पसंख्यक मुस्लिम

डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम प्रवासियों की पहचान और उनके डिपोर्टेशन की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। हर दिन सैकड़ों की संख्या में उन्हें म्यांमार डिपोर्ट किया जा रहा है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों की गहन जांच के जरिए अवैध विदेशी नागरिकों को चिह्नित कर होल्डिंग सेंटरों में भेज रही हैं। इसी बीच कई लोगों के जेहन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन हैं ये रोहिंग्या मुस्लिम?

वे म्यांमार से भारत कैसे पहुंचे और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में इनके खिलाफ यह सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई क्यों की जा रही है? आज के आर्टिकल में हम इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम?

रोहिंग्या मूल रूप से म्यांमार (वर्मा) के रखाइन राज्य में रहने वाला एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। म्यांमार की सरकार और बहुसंख्यक आबादी इन्हें अपना नागरिक नहीं मानती, बल्कि 1982 के नागरिकता कानून के तहत इन्हें 'अवैध बांग्लादेशी प्रवासी' माना जाता है।

इसके चलते रोहिंग्या दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रविहीन समुदायों में से एक हैं।

म्यांमार से क्यों भागे थे रोहिंग्या?

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2017 में रखाइन राज्य में रोहिंग्या चरमपंथियों और म्यांमार की सैन्य ताकतों के बीच भीषण हिंसा भड़क उठी। म्यांमार सेना पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघनों, हिंसा और गांवों को जलाने के आरोप लगे।

ऐसे में अपनी जान बचाने के लिए लगभग 7 से 8 लाख रोहिंग्याओं ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शरण ली। फिर वहीं से कई रोहिंग्या अवैध रास्तों, दलालों और नेटवर्क के जरिए भारत, मलेशिया, थाईलैंड और अन्य एशियाई देशों में फैल गए।

जम्मू-कश्मीर में कैसे हुई रोहिंग्याओं की एंट्री?

भारत में रोहिंग्याओं का आना मुख्य रूप से 2008 और 2012 के दौरान शुरू हुआ था, जो 2017 के बाद काफी बढ़ गया। भारत-बांग्लादेश की लंबी और सुराखदार सीमाओं के जरिए रोहिंग्याओं ने भारत में प्रवेश किया।

क्या कहता है 'फॉरेनर्स एक्ट'?

फॉरेनर्स एक्ट के तहत कानून सरकार को किसी भी विदेशी नागरिक के प्रवेश, ठहराव और देश से बाहर निकालने (Deport) का अधिकार देता है। बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के सीमा पार करने पर इसके तहत आपराधिक मामला दर्ज होता है।

यदि कोई व्यक्ति बिना कागजात के पाया जाता है, तो उसे गिरफ्तार कर 'होल्डिंग सेंटर' या डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है जब तक कि उसके मूल देश के दूतावास से उसकी नागरिकता का सत्यापन न हो जाए और उसे वापस न भेज दिया जाए।

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