'धरती का स्वर्ग' कहलाने वाले जम्मू-कश्मीर का नाम कैसे पड़ा? इसके पीछे छिपे हैं 3 रहस्य
जम्मू-कश्मीर को 'धरती का स्वर्ग' कहा जाता है, और इसके नाम के पीछे ऋषि कश्यप और राजा जंबू लोचन से ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर का इतिहास आप भी जानें।
HighLights
कश्मीर नाम ऋषि कश्यप द्वारा झील खाली करने से जुड़ा है
जम्मू नाम राजा जंबू लोचन की शांतिपूर्ण घटना से आया
यह नाम पौराणिक कथाओं और स्थानीय लोकविश्वासों का संगम है
डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर का नाम सुनते ही बर्फ से ढके पहाड़, हरी-भरी वादियां, झीलें और खूबसूरत नजारे आंखों के सामने आ जाते हैं। वहां की वादियां ऐसी हैं कि जो एक बार चला जाए तो वापस आने का मन नहीं करता, तभी तो उसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस खूबसूरत क्षेत्र का नाम ‘जम्मू-कश्मीर’ कैसे पड़ा?
जैसे हर राज्य और देश के नाम के पीछे एक इतिहास होता है वैसे ही जम्मू-कश्मीर के नाम के पीछे का इतिहास भी बहुत दिलचस्प है। आइए फिर जानते हैं कि आखिर क्या है इसके पीछे की कहानी।
पहले जानते हैं ‘कश्मीर’ नाम की कहानी
ऐसा माना जाता है कि अपनी अनोखी और दिलकश खुबसूरती से लोगों का दिल जीत लेने वाला कश्मीर का नाम ऋषि कश्यप के नाम से पड़ा है।
मान्यता है कि जिस क्षेत्र में आज कश्मीर की खूबसूरत घाटी है, वहां कभी एक विशाल झील हुआ करती थी। इस झील में एक दैत्य का वास बताया जाता है, जिससे यहां रहने वाले लोग परेशान थे।

ऋषि कश्यप ने खाली कराई थी विशाल झील?
पौराणिक कथा के अनुसार, लोगों की परेशानी देखकर ऋषि कश्यप ने इस क्षेत्र को दैत्य से मुक्त कराने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने झील का पानी बाहर निकालकर उस क्षेत्र को रहने योग्य बनाया।
ऐसा माना जाता है कि ‘कश्मीर’ नाम को ‘कश्यप’ से जोड़ा जाता है। समय के साथ शब्दों में परिवर्तन होते गए और ‘कश्यप’ से ‘कश्मीर’ नाम बनने की परंपरागत व्याख्या सामने आई।
'जम्मू' नाम के पीछे का क्या है इतिहास?
कश्मीर का तो आपने जान लिया अब बात कर लेते हैं जम्मू की। दरअसल, ‘जम्मू’ नाम को लेकर एक प्रसिद्ध स्थानीय कथा राजा जंबू लोचन से जुड़ी है। लोकप्रिय कथा के अनुसार, राजा जंबू लोचन ने तवी नदी के किनारे एक शेर और बकरी को एक ही जगह पर शांतिपूर्वक पानी पीते देखा।
शेर और बकरी जैसे स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के शिकारी और शिकार माने जाने वाले जानवरों को इस तरह शांत देखकर राजा को लगा कि यह जगह विशेष है।
उन्हें लगा कि जिस भूमि पर हिंसक और शांत स्वभाव वाले जीव भी बिना भय के साथ रह सकते हैं, वहां इंसानों के लिए भी शांति और समृद्धि का वातावरण हो सकता है।

राजा ने यहीं बसाया शहर?
इस घटना से प्रभावित होकर राजा जंबू लोचन ने इसी क्षेत्र में एक नगर बसाने का निर्णय लिया। माना जाता है कि उनके नाम से ही इस स्थान का नाम ‘जंबू’ पड़ा, जो आगे चलकर ‘जम्मू’ के रूप में प्रचलित हुआ। यह कहानी जम्मू की स्थानीय लोकपरंपराओं में आज भी सुनाई जाती है।
जम्मू और कश्मीर, दो नाम और दो अलग परंपराएं
इस तरह ‘जम्मू-कश्मीर’ नाम को लेकर दो प्रमुख परंपराएं सामने आती हैं। कश्मीर के नाम को जहां ऋषि कश्यप से जुड़ी पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है, वहीं जम्मू का नाम राजा जंबू लोचन से जुड़ी स्थानीय परंपरा में बताया जाता है।
यानी जम्मू-कश्मीर का नाम सिर्फ एक भौगोलिक पहचान नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों से चली आ रही पौराणिक कथाओं, स्थानीय लोकविश्वासों और ऐतिहासिक परंपराओं की परतें भी जुड़ी हुई हैं।
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