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    Kashmir Militancy : टारगेट किलिंग के बाद कश्मीर में अब स्कूलों और पुलों को उड़ाने की धमकी

    By naveen sharmaEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Thu, 03 Nov 2022 12:10 PM (IST)

    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकी सरगना उन सभी लोगों को निशाना बनाने की फिराक में हैं कश्मीर में अलगाववाद और जिहादी एजेंडे को चलने नहीं देते। इस षड्यंत्र का जिम्मा लश्कर ए तैयबा के हिट स्क्वाड टीआरएफ को ही सौंपा गया है।

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    टीआरएफ ने ही बीते तीन वर्ष के दौरान अधिकांश टारगेट किलिंग की हैं।(File Photo)

    श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : कश्मीर में अब अलगाववादियों की नहीं चलती और आतंकियों का भय भी खत्म हुआ है। कश्मीरियों द्वारा इनके एजेंडे को नकारे जाने से हताश आतंकी संगठन गीदड़भभकी पर उतर आए हैं। द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अब पुलिस अधिकारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं व अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग और स्कूलों, पुलों व सड़कों को धमाकों से उड़ाकर कश्मीर को अफगानिस्तान बनाने की धमकी दी है। इसके लिए उसने लोन वुल्फ और ईगल स्क्वाड नाम से माड्यूल बना रखे हैं। प्रत्येक में दो से तीन आतंकी शामिल किए गए हैं।

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    खुफिया एजेंसियों ने इस संदर्भ में अलर्ट जारी किया है। इसके बाद कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की गई है। पुलिस प्रशासन ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने कार्याधिकार क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने और औचक तलाशी अभियान के निर्देश दिए हैं।

    संबंधित सूत्रों ने बताया कि टीआरएफ के इस षड्यंत्र का पर्दाफाश मंगलवार को श्रीनगर के रंगरेथ इलाके में आइईडी धमाके की तैयारी करते हुए पकड़े के गए तीन आतंकियों ने भी किया है। इन्हें रंगरेथ में धमाका और बड़गाम में कुछ खास लोगों की टारगेट किलिंग का जिम्मा सौंपा गया था। इससे पहले पुलवामा में टीआरएफ के तीन आतंकी पकड़े गए जो दूसरे राज्यों के श्रमिकों और सुरक्षाबलों के नाके की ताक में थे।

    सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकी सरगना उन सभी लोगों को निशाना बनाने की फिराक में हैं कश्मीर में अलगाववाद और जिहादी एजेंडे को चलने नहीं देते। इसका मकसद आम लोगों में फिर से डर पैदा करना है। इस षड्यंत्र का जिम्मा लश्कर ए तैयबा के हिट स्क्वाड टीआरएफ को ही सौंपा गया है। टीआरएफ ने ही बीते तीन वर्ष के दौरान अधिकांश टारगेट किलिंग की हैं।

    इंटरनेट मीडिया पर एक सूची डाली : टीआरएफ ने लोगों को डराने के लिए इंटरनेट मीडिया पर एक सूची डाली है। इसमें पुलिस अधिकारियों विशेषकर थाना प्रभारियों और उनके स्वजन, कश्मीर लौटने वाले विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं, गैर कश्मीरी कर्मचारियों, छह माह से ज्यादा समय से श्रीनगर में रह रहे दूसरे राज्यों के लोगों, श्रमिकों, रेहड़ी फड़ी वालों को निशाना बनाने की गीदड़भभकी दी है। इसमें उसने अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ बोलने वाले, राष्ट्रवादियों और केंद्र सरकार या प्रदेश प्रशासन के अधिकारियों से मिलने वालों को भी शामिल किया है। उसने सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, सुरक्षाबलों द्वारा इस्तेमाल होने वाले पुल और सड़कों को भी नष्ट करने की धमकी दी है।

    सुरक्षा तंत्र में व्यापक सुधार : पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी संगठन टारगेट किलिंग के अलावा कई जगह आइईडी धमाके कर सकता है। सुरक्षाबलों या भीड़ भरे इलाके में ग्रेनेड हमले की भी आशंका है। इन सभी बिंदुओं पर सुरक्षा तंत्र में व्यापक सुधार लाया गया है। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलीजेंस को बढ़ाया गया है। बीते तीन दिनों में चार आतंकियों को मारा जाना और करीब आठ का पकड़ा जाना इसका ही नतीजा है।

    • टीआरएफ कोई अलग संगठन नहीं है। यह पाकिस्तान द्वारा बनाए गए लश्कर ए तैयबा का ही एक हिस्सा है। वह आए दिन लोगों को डराने के लिए ऐसी धमकियां जारी करता रहा है। यह पत्र भी ऐसा ही है। ऐसी धमकियां आतंकी संगठन अक्सर देते रहते हैं। हम इनसे निपटने के लिए तैयार हैं। जो धमकियां या आतंकियों का साथ देते हैं, उन पर कठोर कार्रवाई की जाती है। जो भी हालात बिगाड़ने की कोशिश करेगा...नपा जाएगा। -दिलबाग सिंह, पुलिस महानिदेशक, जम्मू कश्मीर