डल झील के चार चिनार की फिर लौट रही है खूबसूरती, दो खत्म हो चुके चिनार की जगह फिर दो चिनार प्रतिरोपित
चार चिनार टापू पर स्थित चिनार का एक पेड़ 10 साल पहले सूखने लगा था। उसे बचाने के कई प्रयास किए गए लेकिन वन विभाग के वैज्ञानिक सफल नहीं हो पाए। इसके बाद वर्ष 2014 की विनाशकारी बाढ़ ने भी चिनार के दो अन्य पेड़ भी बर्बाद कर दिए।

श्रीनगर, नवीन नवाज । डल झील में स्थित टापू चार चिनार कश्मीर आने वाले पर्यटकों को बरबस ही अपनी तरफ लुभा लेते हैं। कुछ वर्षाें से यह टापू अपनी खूबसूरती गंवा चुका था। क्योंकि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले चिनार के चार पेड़ों में से दो पूरी तरह खत्म हो गए थे। इससे पहले कि टापू पूरी तरह वीरान होता, सोमवार को चिनार के दो बड़े पेड़ दूसरी जगह से उखाड़ वहां प्रतिरोपित किए गए। कश्मीर में अपनी तरह का पहला प्रयोग है। इस तरह के प्रयोग राजस्थान के जयपुर में पहले भी हो चुके हैं।
चार चिनार को चार चिनारी के नाम से जाना जाता है। इस टापू का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब के बाद मुराद बख्श ने कराया था। इस टापू पर चार चिनार थे, जो इसे पूरी तरह से रुमानी बनाते थे। बालीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग व कई हिट गाने यहीं फिल्माए गए। देशी-विदेशी सैलानियों को चार चिनारी अपनी तरफ आकर्षित करती है।
चार चिनार टापू पर स्थित चिनार का एक पेड़ 10 साल पहले सूखने लगा था। उसे बचाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन वन विभाग के वैज्ञानिक सफल नहीं हो पाए। इसके बाद वर्ष 2014 की विनाशकारी बाढ़ ने भी चिनार के दो अन्य पेड़ भी बर्बाद कर दिए। चार चिनारी की खूबसूरती को बहाल करने के लिए वन और फ्लोरीकल्चर विभाग ने चिनार के नए पौधे लगाए, लेकिन कोई भी पनप नहीं पाया। टापू की मिट्टी की भी जांच की गई, लेकिन कोई हल नही निकला।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते साल अक्टूबर में वन, पर्यटन और फलोरीकल्चर विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में चार चिनारी की खूबसूरती को फिर से बहाल करने के लिए सभी संभावनाओं को तलाशने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि अगर हो सके तो किसी अन्य जगह पर उगे चिनार के किसी विशाल पेड़ को वहां से जड़ समेत उखाड़ उसे चार चिनारी पर प्रतिरोपित किए जाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसके बाद वन विभाग ने संबंधित विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श किया। चिनार के पेड़ों के प्रतिरोपण की दिशा में काम शुरु कर दिया।
कुछ ही दिनों में जड़़ों को मजबूती मिलेगी :
फलोरीकल्चर विभाग के सचिवायुक्त शेख फैयाज अहमद ने कहा कि शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और वन विभाग के विशेषज्ञों ने चिनार के पेड़ों को प्रतिरोपित किए जाने से पहले फिर चार चिनारी टापू की मिट्टी की जांच की। उनकी अनुमति के बाद ही चिनार के तीन बड़े पेड़ों को प्रतिरोपित किए जाने का काम शुरू कियाा। तीन पेड़ एक बड़े शिकारे में जड़ समेत चार चिनारी टापू पर पहुंचाए गए और उनमें से दो को प्रतिरोपित भी कर दिया गया है। कुछ ही दिनों में यह पेड़ जड़़ों को मजबूती से जमा लेंगे। इन पेड़ों की संबंधित वैज्ञानिकों द्वारा लगातार निगरानी की जाएगी।
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