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    Shani Jayanti 2021: श्री शनि देव जयंती 10 जून को मनाई जाएगी, इस विधि से करें शनि देव को प्रसन्न

    By Vikas AbrolEdited By:
    Updated: Tue, 08 Jun 2021 04:01 PM (IST)

    श्री शनि देव जयंती 10 जून गुरुवार को मनाई जाएगी। नवग्रहों में श्री शनिदेव जी सबसे ज्यादा शक्तिशाली ग्रह माने जाते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन श्री शनि देव जी का जन्म हुआ था। मान्यता के अनुसार शनि देव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं।

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    ज्येष्ठ अमावस्या तिथि जून 09 बुधवार दोपहर 01 बजकर 59 बजे शुरू होगी

    जम्मू, जागरण संवाददाता : श्री शनि देव जयंती 10 जून गुरुवार को मनाई जाएगी। नवग्रहों में श्री शनिदेव जी सबसे ज्यादा शक्तिशाली ग्रह माने जाते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन श्री शनि देव जी का जन्म हुआ था। मान्यता के अनुसार शनि देव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं।

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    ज्येष्ठ अमावस्या तिथि जून 09 बुधवार दोपहर 01 बजकर 59 बजे शुरू होगी और 10 जून शाम 04 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी अमावस्या तिथि 10 जून को है।इस लिए श्री शनि देव जयंती 10 जून को मनाई जाएगी। श्री शनि देव न्याय प्रिय और दंडाधिकारी हैं। इसलिए उन्हें कलयुग का न्यायाधीश कहते हैं। श्री शनि देव का कार्य प्रकृति में संतुलन पैदा करना है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्री शनि देव जी कर्म और सेवा का कारक होते हैं। यानि इसका सीधा संबंध आपकी नौकरी और व्यवसाय से होता है। इनके प्रभाव से ही मनुष्य के जीवन में बड़े बदलाव होते हैं।

    श्री शनि देव जयंती को शनि देव की पूजा से कुंडली के शनि दोष, ढैय्या, साढ़ेसाती आदि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। श्री शनि देव जी की साढे़साती धनु राशि, मकर राशि और कुंभ राशि पर है। धनु वालों पर इसका अंतिम चरण, मकर वालों पर दूसरा चरण और कुंभ वालों पर अभी पहला ही चरण चल रहा है। इसके साथ ही मिथुन राशि और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रहा है इसलिए विशेष रूप से इन पांच राशियों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त जिन राशियों पर शनि की महादशा, अंर्तदशा चल रही है।

    शनि देव को ऐसे करें प्रसन्न

    काली गाय की सेवा करने से श्री शनि देव जी प्रसन्न होते हैं। गरीबों, असहायों को शनिवार को काला कंबल सप्तधान्य, काले वस्त्र दान करें। इस दिन व्रत रखें। श्री शनि देव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करें। इन 10 नामों से श्री शनि देव का पूजन करें।कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद व पिप्पलाद, एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत, शनि का दान लेने वालाें को दान कर दें। श्री हनुमान जी को चमेली के तेल का दीप जलाएं, श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    श्री शनि देव का सरसों के तेल एवं काले तिल से अभिषेक करें। काले घोड़े की नाल का छल्ला इस दिन अथवा शनिवार के दिन मध्यमा अंगुली में धारण करें।शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आयें। शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या श्री शनिदेव जी जयंती के दिन किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें। श्री शनिदेव प्रसन्न होंगे तथा शनि के कारण जितनी भी समस्याएं हैं। उनका निदान होगा।

    सूर्योदय से पहले पीपल की पूजा करें। पीपल के पेड़ पर तेल में लोहे की कील डालकर चढ़ाएं। रविवार को छोड़कर श्री शनिदेव जी की मूर्ति पर 43 दिन तक लगातार तेल चढांए। हर शनिवार बंदरों और कुतों को गुड़ और काले चने खिलाएं साथ ही श्री शनिदेव पर भी तेल के साथ काले तिल अर्पित करें। शनिवार को काले चमड़े के जूते, काले वस्त्र पहनें।