जम्मू, जेएनएन। एनआइए द्वारा जम्मू की विशेष अदालत में दायर की गई चार्जशीट में पर द परत वहिद के राज खुलते जा रहे हैं। एनआइएस ने अपनी चार्जशीट में पीडीपी युवा नेता वहिद-उर-रहमान पारा के हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ संबंध होने का आरोप लगाने के साथ एक और बड़ा खुलासा किया है। एनआइए ने वहिद पर यह आरोप भी लगाया है कि जब वर्ष 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर बॉय बुरहान वानी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था तब पारा ने कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद को 5 करोड़ रुपये कश्मीर को अशांत रखने के लिए दिए थे।

एनआइए द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार जुलाई 2016 में जब बुरहान मारा गया उस दौरान पारा अल्ताफ अहमद शाह उर्फ ​​अल्ताफ फंटूश के संपर्क में था। उसने बुरहान की मौत को लेकर लोगों में भड़के आक्रोश को देखते हुए शाह को यह कहते हुए पांच करोड़ रूपये दिए कि घाटी में यह उबाल वह बनाए रखें। अशांति, पथराव और प्रदर्शनों का सिलसिला थमना नहीं चाहिए। हालांकि पारा ने एनआइए के इन सभी आरोपों से इंकार किया है। पारा के वकील ने अदालत में यह तर्क रखा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा कि जुलाई और अक्टूबर में एनआइए द्वारा पेश की गई पूरक चार्जशीट में कोई पुख्ता संदर्भ नहीं थे। पारा के वकील के इन तर्कों के बाद एनआइए अदालत ने वहीद को जमानत भी दे दी थी।

जमानत मिलने के बाद कश्मीर में सीआइडी की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने पारा को एक बार फिर मुख्यधारा के राजनेताओं और अलगाववादियों के बीच सांठगांठ के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से वह जेल में ही हैं। श्रीनगर में एनआइए अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने यह आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष के नेताओं काे अपने हक में लाने के लिए इस तरह का दबाव बना रहे हैं। जांच एजेंसियों यह सब भाजपा सरकार के कहने पर कर रही हैं।

अब एनआइए ने यह दावा किया है कि जांच में उन्हें इस बात का पता चला है कि पारा ने ही शाह को कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए पांच करोड़ रूपये दिए थे। सैयद अली शाह गिलानी का दामाद शाह उनका काफी करीबी माना जाता है। इसके अलावा शाह ही हुर्रियत कांफ्रेंस के हार्ड लाइन गुट के हिस्सा भी था। पारा ने यह राशि अपनी ओर से नहीं बल्कि पीडीपी की ओर से हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को दी थी। शाह युवा नेता वहिद के संपर्क में था। पारा भी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख और तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी विश्वासपात्र माना जाता था।

आपको जानकारी हो कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में करीब 53 दिनों तक हड़ताल, पथरबाजी का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान कर्फ्यू रहा। यही नहीं घाटी में इस अशांति के माहौल में करीब 100 लोगों ने अपनी जान गंवाई, हजारों घायल हुए। घायलों में 4000 के करीब सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। अलगावादियों और आतंकवादी संगठनों के बीच सांठगांठ है। इसका खुलावा पहले ही एनआइए कर चुकी है। कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए अलगाववादी संगठन धन मुहैया कराते थे। इस गठजोड़ में शामिल होने के आरोप में गिलानी के दामाद शाह को जुलाई 2017 में ही एनआइए ने गिरफ्तार कर लिया था। वह इस समय हिरासत में है।

Edited By: Rahul Sharma