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    जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में भीषण आग, ऐतिहासिक दार-उल-मोमिनात मदरसा जलकर खाक

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 06:46 PM (IST)

    कुपवाड़ा जिले के करनाह में भीषण आग लगने से ऐतिहासिक दार-उल-मोमिनात मदरसा पूरी तरह से जलकर राख हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार इस घटना से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। भारतीय सेना और स्थानीय लोगों ने मिलकर आग बुझाने में सहयोग किया। व्यापार मंडल के अध्यक्ष हाजी तसलीम मीर ने मदरसे के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता की अपील की है।

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    आग में राख हुआ दार-उल-मोमिनात मदरसा। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र करनाह के कंडी इलाके में शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि को भीषण आग लग गई जिससे ऐतिहासिक दार-उल-मोमिनात मदरसा पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

    स्थानीय लोगों ने बताया कि आग ने इस संस्थान को राख में बदल दिया जिससे लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। तीन दशकों से भी ज़्यादा समय से मदरसा दार-उल-मोमिनात करनाह में इस्लामी शिक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का केंद्र रहा है और अनगिनत छात्रों के जीवन को आकार देता रहा है। इसके नष्ट होने से क्षेत्र के धार्मिक और शैक्षिक ताने-बाने में एक गहरा शून्य पैदा हो गया है।

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    आग लगने के तुरंत बाद भारतीय सेना मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग और स्थानीय लोगों के साथ, सेना ने आग को और फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस प्रकार आस-पास की संपत्तियों की सुरक्षा की।

    मदरसा प्रशासन के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए व्यापार मंडल करनाह के अध्यक्ष और विधायक करनाह के निजी सचिव हाजी तसलीम मीर ने घटनास्थल का दौरा किया और दार-उल-मोमिनात के अध्यक्ष हाजी शब्बीर अहमद तुर्क और संस्था के अन्य सदस्यों को अपना समर्थन व्यक्त किया।

    उन्होंने करनाह के विधायक जावेद मिरचल, कुपवाड़ा जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से मदरसे के लिए तत्काल अनुग्रह राशि सुनिश्चित करने की अपील की।

    हाजी तसलीम मीर ने कहा कि दार-उल-मोमिनात दशकों से प्रकाश और ज्ञान का स्रोत रहा है। हमें इस प्रतिष्ठित संस्था के पुनर्निर्माण के लिए एकजुट होना चाहिए ताकि हमारी घाटी में शिक्षा और आस्था की ज्योति सदैव प्रज्वलित रहे।