लद्दाख में आर्टिकल 371 की चर्चा तेज, सात जिलों में लागू होगा हिल काउंसिल एक्ट; लोगों के लिए क्या-क्या बदल जाएगा?
लद्दाख प्रशासन ने स्थानीय भागीदारी और स्वशासन को मजबूत करने के लिए सभी सात जिलों को लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम के लाभ देने का फैसला किया है।

लद्दाख में लागू होगा हिल काउंसिल एक्ट (फाइल फोटो)
HighLights
लद्दाख के सभी सात जिलों को LAHDC लाभ मिलेंगे
स्थानीय भागीदारी और स्वशासन को मजबूत किया जाएगा
अनुच्छेद 371 के तहत विशेष सुरक्षा उपायों पर चर्चा
डिजिटस डेस्क, जम्मू। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। स्थानीय लोगों की भागीदारी और स्व शासन को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब लद्दाख के सभी सात जिलों को लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम के लाभ मिलेंगे। इसके लिए जिलों में एएचडीसी यानी स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (हिल डेवलपमेंट काउंसिल) बनाई जाएंगी।
लद्दाख के मुख्यसचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि प्रदेश में नवगठित 17 तहसीलों में जल्द तहसीलदारों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश के सभी सात जिलों को लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम के लाभ मिलेंगे।
लेह में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुंचाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना व दूरदराज क्षेत्रों में विकास को गति देना है।
आशीष कुंद्रा ने कहा कि लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल एक्ट की धारा 3(1) में पहले से ही हर जिले में एक काउंसिल का प्रावधान है और कानून में सिर्फ मामूली बदलाव की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि उनके पास LAHDC एक्ट के तहत मिलने वाली शक्तियां होंगी। उन्होंने इस फैसले को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक अहम कदम बताया।
LAHDC के अंतर्गत शक्तियां क्या हैं?
लद्दाख के विकास के लिए लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद अधिनियम, 1995 बनाया गया था। इसके अंतर्गत अगस्त, 1995 में चुनाव हुए और 3 सितंबर, 1995 को लेह में इस काउंसिल की पहली बैठक हुई।
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति (पहाड़ और कठिन रास्ते) को देखते हुए, यहां के विकास के कामों में आम जनता की भागीदारी जरूरी थी। इस परिषद के बनने से आम लोगों को क्षेत्र के विकास और प्लानिंग में अपनी बात रखने का मौका मिला।
लोगों को क्या लाभ मिलेंगे?
- स्थानीय लोगों को अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक, नीतियां बनाने, योजनाएं लागू करने और निर्णय लेने का अधिकार मिलता है।
- दुर्गम रास्तों का विकास, पानी बिजली जैसी मूल सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना।
- स्थानीय लोगों को उनके अनुसार रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराना।
- पर्वतीय क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना ताकि लोगों को कठिनाई से छुटकारा मिले।
- क्षेत्र के विकास के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी आवश्यक होगी।
यह भी पढ़ें- लद्दाख में मतांतरण नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, अल्बर्ट जेरी पर FIR और 8 लोग गिरफ्तार; 13 साल से थे सक्रिय
सात राज्यों तक बढ़ा दायरा
LAHDC जहां सिर्फ दो जिलों कारगिल और लेह तक ही सीमित थीं। वहीं अब इसका दायरा बढ़ाकर सात जिलों के लिए कर दिया गया है। पिछले साल लद्दाख में पांच और जिले बनाए गए थे। इनमें शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं।
कुंद्रा ने सोमवार को मीडियाकर्मियों को बताया कि आगे होने वाली बातचीत में केंद्रशासित-स्तर की चुनी हुई संस्था के ढांचे और आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा उपायों के दायरे पर ध्यान दिया जाएगा।
अनुच्छेद 371 क्या है?
संविधान का अनुच्छेद 371 कुछ राज्यों और क्षेत्रों को स्थानीय हितों, जैसे सांस्कृतिक पहचान, जमीन के अधिकार, रोजगार के अवसर और प्रशासनिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा उपाय और स्वायत्तता देता है।
भारतीय संविधान का यह प्रावधान मानता है कि अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियां अनोखी हो सकती हैं, जिनके लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा की जरूरत होती है।
संविधान के भाग XXI में ये विशेष प्रावधान शामिल हैं, जिनमें अनुच्छेद 371A से 371J तक के क्लॉज आते हैं। समय के साथ, अलग-अलग राज्यों को अनुच्छेद 371 के विभिन्न क्लॉज के तहत विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएं मिली हैं, जो उनकी खास ज़रूरतों और ऐतिहासिक परिस्थितियों के हिसाब से बनाई गई हैं।
