लद्दाख में मतांतरण नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, अल्बर्ट जेरी पर FIR और 8 लोग गिरफ्तार; 13 साल से थे सक्रिय
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के जंस्कार में ईसाई मिशनरियों द्वारा मतांतरण के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। कन्याकुमारी ...और पढ़ें

लद्दाख में मतांतरण नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा। फाइल फोटो
HighLights
जंस्कार में ईसाई मिशनरी अल्बर्ट जेरी पर एफआईआर दर्ज।
पुलिस ने मतांतरण मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया।
जेरी 13 साल से लद्दाख में धर्मांतरण गतिविधियों में सक्रिय था।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के जंस्कार में डेरा डाल कर मतांतरण कर रहे इसाई मिशनरियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। पुलिस ने इस मामले में जंस्कार में डेरा डाल कर लोगों को इंसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने वाले कन्याकुमारी के अल्बर्ट जेरी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के साथ आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।
पिछले 13 सालों से डेरा डाल कर मिशनरी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे अल्बर्ट जेरी ने बोधी व जंस्कारी भाषा में जंस्कारी बाइबिल' नामक एक मोबाइल एप विकसित किया था। इस वर्ष जून महीने में जेरी की गतिविधियों का खुलासा होने के बाद उसका विरोध शुरू हो गया था।
पुलिस ने मतांतरण के इस मामले में जून महीने में आठ लोगों को गिरफ़्तार करने के बाद अब जेरी के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। स्थानीय लोगों की मिशनरी गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा खाेलने के बाद जेरी लद्दाख छोड़ चुका है। लद्दाख में धर्मांतरण के मामलों में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अब मतांतरण कर रहे पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में और गिरफ्तारियां होना संभव है।
उल्लंघन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
लद्दाख पुलिस ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक व जनसांख्यिकीय संरचना को प्रभावित करने के लिए संगठित मतांतरण के प्रति जीरो टालरेंस नीति अपनाई गई है। कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी व लद्दाख की शांति, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अल्बर्ट जेरी ने कुछ स्थानीय युवाओं को फुसलाकर उनसे बाइबिल का जंस्कारी भाषा में अनुवाद करवाया था। उसने एक मोबाइल एप विकसित किया था जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था। जेरी ने शुरुआत में इस एप पर डेवलपर के रूप में उसका नाम दर्ज था। लेकिन बाद में बदलकर इसे विन पब्लिकेशन ट्रस्ट कर दिया गया था। फिलहाल यह एप गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है।
तमिलनाडु के कन्याकुमारी निवासी अल्बर्ट जेरी पुत्र जान विलियम पिछले 13 वर्षों से ज़ांस्कर में रहकर ईसाई मिशनरी गतिविधियों में संलिप्त था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जेरी ने लगभग दस वर्षों तक स्थानीय भाषा का शब्दकोश तैयार किया व उसी के आधार पर बाइबिल का स्थानीय बोलियों में अनुवाद कर कथित रूप से धर्मांतरण के उद्देश्य से उसका उपयोग किया।
2010 में पहली बार लद्दाख आया था अल्बर्ट जेरी
एलबीए की यूथ विंग के प्रधान डा सोनम पालदन का कहना है कि जेरी ने एक मकान को किराए पर लेकर अपनी मिशनरी गतिविधियों को संचालित किया था। उन्होंने बताया कि यूथ विंग ने उस मकान में जाकर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया था। यह सरीह गतिविधियों लद्दाख में बाहर से लोगों द्वारा सांचलित की जा रही थी।
लद्दाख पुलिस अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन गतिविधियों के पीछे किसी विदेशी फंडिंग या बाहरी संगठन की भूमिका तो नहीं है। पुलिस का कहना है कि हाल के दिनों में लद्दाख में धर्मांतरण के मामलों में वृद्धि देखी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि अल्बर्ट जेरी वर्ष 2010 में पहली बार लद्दाख आया था और कुछ समय तक लेह के एक होटल में कार्य किया। जनवरी 2011 में वह एक स्थानीय स्वयंसेवी संस्था द्वारा संचालित शीतकालीन ट्यूशन कार्यक्रम के तहत ज़ांस्कर पहुंचा। इसके बाद वह अपने परिवार सहित वहीं बस गया और निजी स्कूलों में गणित शिक्षक तथा पर्यटन गाइड के रूप में कार्य करता रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ वर्ष पहले उसने स्थानीय भाषा में अनुवादित ईसाई धार्मिक साहित्य व पुस्तकें वितरित की थीं। मामला सार्वजनिक होने के बाद यह गतिविधियां बंद कर दी गईं। यह भी आरोप है कि उसने गरीब परिवारों में सोलर लालटेन व राशन सामग्री वितरित की।
जंस्कार में ट्रस्ट पंजीकृत
पूछताछ में जेरी ने पुलिस को बताया था कि वह चेन्नई स्थित बी टीम ट्रस्ट से जुड़ा है। वह हर वर्ष सर्दियों के दौरान लगभग चार महीने वहीं बिताता है व वहीं से उसे वेतन मिलता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने ज़ांस्कर में एक ट्रस्ट पंजीकृत कराया है।
इसी बीच पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 के लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल चुनाव व 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज था। स्थानीय लोगों के विरोध के चलते वह मतदान नहीं कर सका। बाद में चुनाव अधिकारियों द्वारा उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया।
संदिग्ध सामाग्री जब्त
लद्दाख पुलिस ने 17 जून 2026 को मतांरण नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। उन पर जंस्कार चांगथांग व आर्यन वैली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को जोड़ने व मतांतरण से संबंधित सामग्री का अनुवाद, निर्माण व प्रसार करने का आरोप है। इस मामले में एफआईआर संख्या 126/2026 दर्ज की गई थी।
तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने कई लैपटाप, डिजिटल उपकरण व अन्य संदिग्ध सामग्री जब्त की थी। पूरा नेटवर्क का पता लगाने के लिए जब्ज सामान की फोरेंसिक जांच जारी है।
