Kishtwar Cloudburst: कुदरत का कहर: धूमिल होती उम्मीदें, बढ़ती जा रही प्रतीक्षा, कोई नहीं आ रहा अपना
किश्तवाड़ में बादल फटने से हुई त्रासदी में कुछ शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। जीएमसी जम्मू के शवगृह में तीन शव पड़े हैं जिनमें से एक का सिर नहीं है। लापता लोगों की संख्या भी बहुत अधिक है। डीएनए जांच की जा रही है ताकि शवों की पहचान हो सके। अगर कोई नहीं आएगा तो गैर सरकारी समिति उनका अंतिम संस्कार करेगी।

रोहित जंडियाल, जागरण, जम्मू। हर इंसान की यह अंतिम इच्छा होती है कि उसकी मौत के पास उसके शव को मुखाग्नि उसका बेटा या फिर परिवार का कोई अन्य सदस्य दे लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जहां मृतकों के शव ही नहीं मिलते।
अगर मिलते भी हैं तो क्षत-विक्षप्त स्थिति में जहां उनकी पहचान होना संभव ही नहीं हो पाता। कुछ ऐसी ही स्थिति पंद्रह दिन पहले जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले के चशोती में हुई। बादल फटने के कारण कई लोग कीचड़ और पानी के बहाव में बह गए तो कुछ मलबे में दब कर रह गए। कुछ शव मिले तो उन्हें देख रोंगटे खड़े हो जाते थे।
किसी के धड़ पर सिर नहीं था तो किसी के शरीर मं बाजू और टांगे। कुछ ऐसे ही शव राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू के शवगृह में पड़े हैं। न तो इन्हें लेने के लिए कोई आगे आ रहा है और न ही इनकी पहचान संभव हो पा रही है।
तीन शवों की नहीं हुई पहचान
जीएमसी के शव गृह में पड़े इन तीन शवों में से एक का सिर नहीं है और दो के पास से कोई भी पहचान पत्र नहीं मिल पाया। विडंबना यह है कि इनकी सुध लेने के लिए भी कोई नहीं आया है। शंका यह जताई जा रही है कि इनके परिवार के अन्य सदस्य भी इस त्रासदी में मारे गए हैं या किसी को यह जानकारी ही नहीं है कि जीएमसी के शवगृह में भी उनका अपना कोई हो सकता है।
तीस लोग अभी भी लापता
सरकारी आंकड़े अभी तीस लोगों के लापता होने की बात कर रहा है तो गैर सरकारी आंकड़े संख्या को दो सौ के आसपास बताते हैं। स्थिति जो भी हो, अब जीएमसी जम्मू के डाक्टरों को भी लगने लगा है कि शायद ही कोई इन शवों को लेने के लिए आगे आया। अलवत्ता इन शवों की डीएनए जांच की गई है। अभी रिपोर्ट आना शेष है। इसका मकसद यही है कि अगर अब कोई शव लेने आता है तो दोनों को डीएनए का मिलाप कर शव परिजनों को सौंपा जाए।
गैर सरकारी समिति करेगी अंतिम संस्कार
अगर फिर भी कोई नहीं आएगा तो सैर सरकारी समिति इन शवों का अंतिम संस्कार कर देगी। जीएमसी जम्मू के उप चिकित्सा अधीक्षक डा. भारत भूषण शर्मा का कहना है कि तीन शवों और पांच अंगों को लेने के लिए कोई नहीं आया है। इन्हें शवगृह में रखा गया है। अगर कोई आएगा तो डीएनए जांच के बाद इन्हें परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाएगा। गौरतलब है कि जीएमसी जम्मू में ऐसे कई लावारिस शव आते हैं जिन्हें लेने के लिए कोई नहीं आता।
आठ और लावरिस, उम्मीद कायम
जीएमसी जम्मू के शवगृह में आठ और लावारिस शव पड़े हैं। यह शव मंगलवार रात को श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन के कारण मारे गए लोगों के हैं। इनमें एक शव छोटी बच्ची का भी है। इनके पास से भी कोई पहचान पत्र नहीं मिल पाया है। हालांकि यह उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से कुछ के परिजन घायल अवस्था में इलाज करवा रहे हो सकते हैं। लेकिन यह शव भी जीएमसी जम्मू में बीते बुधवार से रखे हुए हैं। डाक्टरों का कहना है कि इन शवों की जल्दी ही पहचान होने की उम्मीद है।
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