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    एक बड़ी दुकान से भी कम कमाता है जम्मू नगर निगम, प्रतिदिन दो लाख रूपये की आमदन भी नहीं

    By Rahul SharmaEdited By:
    Updated: Tue, 12 Mar 2019 10:42 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर सरकार से प्रति माह कर्मचारियों के वेतन के लिए दो करोड़ रुपये मिलते हैं। इसी से नगर निगम चल रहा है।

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    एक बड़ी दुकान से भी कम कमाता है जम्मू नगर निगम, प्रतिदिन दो लाख रूपये की आमदन भी नहीं

    जम्मू, अंचल सिंह। महानगरों की दौड़ में शामिल होने जा रहा जम्मू नगर निगम स्वयं बैसाखियों के सहारे है। सरकार अगर जम्मू नगर निगम की मदद करना छोड़ दे तो महीने भर में ही यह दवालिया हो जाएगा। बड़े-बड़े दावे करने वाले जम्मू नगर निगम की आमदन शहर की किसी बड़ी दुकान के बराबर भी नहीं। जम्मू नगर निगम प्रतिदिन करीब दो लाख रुपये का राजस्व ही जुटा पाता है। यानि प्रति माह करीब 60 लाख रुपये। दूसरी ओर यहां के करीब चार हजार कर्मचारियों का प्रति माह वेतन दो करोड़ रुपये के आसपास जाता है।

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    जम्मू नगर निगम के अधीन 75 वार्ड आते हैं। करीब 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र है। शहर की आबादी करीब 15 लाख है। जम्मू नगर निगम ने ही शहर में विभिन्न विकास कार्य करवाने होते हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार से प्रति माह कर्मचारियों के वेतन के लिए दो करोड़ रुपये मिलते हैं। इसी से नगर निगम चल रहा है। अन्यथा राजस्व जुटाने के स्नोत निगम के पास न के बराबर ही हैं। वर्ष 2005 से 2010 तक नगर निगम के गठन के बाद थोड़ा सुधार हुआ था। राजस्व में बढ़ोतरी भी हुई थी, लेकिन वर्ष 2010 में निगम के समाप्त होने के साथ ही व्यवस्था फिर जस की तस हो गई।

    खत्म होती आमदनी : वर्ष 2005 से 2010 तक निगम के जनरल हाउस में विभिन्न फैसले लेकर टैक्स लगाए गए। डोर-टू-डोर कचरा उठाने, दुकानों, प्रतिष्ठानों को ट्रेड टैक्स व रेहड़ी फीस से निगम की आदमनी बढ़ाई गई। 2010 में कॉरपोरेटरों का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही निगम फिर पुराने र्ढें पर आना शुरू हो गया। मौजूदा स्थिति यह है कि पिछले दो वर्षों से नगर निगम में रेहडिय़ों के लाइसेंस बनाना बंद हो गए हैं। न ही इनका रिन्यूवल हो रहा है। पिछले छह-सात वर्षो से कोई ट्रेड टैक्स नहीं लिया जाता। इतना ही नहीं होर्डिंग, विज्ञापनों से भी बेहद कम राजस्व आता है। महीनों में तीन-चार बोका (बिल्डिंग ऑपरेशन कंट्रोलिंग आथारिटी) की बैठकें कर नक्शे पास करने से जो आमदनी होती थी, वो भी खत्म होकर रह गई है। कभी-कभार ही बोका की बैठकें होती हैं। उसमें भी बहुत से नक्शों पर आपात्तियां लगा दी जाती हैं।

    इन माध्यमों से बढ़ सकता है राजस्व

    - नगर निगम की विज्ञापन नीति को प्रभावी ढंग से लागू कर (मौजूदा स्थित : बिना अनुमति शहर में लगे हैं बोर्ड व होर्डिग)

    - सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को एनओसी देकर (मौजूदा स्थित : मिलीभगत से राजस्व को लगाया जा रहा चूना)

    - ट्रेड टैक्स जुटाकर (मौजूदा स्थित : वर्ष 2010 से कोई ट्रेड टैक्स नहीं लिया गया)

    - टेलीकॉम आपरेटरों से लाइसेंस फीस (मौजूदा स्थित : आ रहा राजस्व)

    - सभी प्रकार के आयोजनों को मंजूरी देकर (मौजूदा स्थित : कभी कभार लेते हैं मंजूरी)

    - निगम की संपत्ति से किराया लेकर (मौजूदा स्थित : मामूली किराया)

    - सभी रोटरियों से फीस जुटाकर (मौजूदा स्थित : आ रहा राजस्व)

    - पालीथिन, होर्डिंग, रेहडिय़ों की जब्ती (मौजूदा स्थित : मामूली जुर्माना)

    - पटाखों के स्टालों की अनुमति से (मौजूदा स्थिति : आ रहा राजस्व पर साल में एक ही बार)

    - पार्किंग स्थलों से फीस जुटाकर (मौजूदा स्थित : मिलीभगत से मामूली राजस्व की प्राप्ति)

    - रेहड़ी फीस : (मौजूदा स्थित : पिछले दो साल में न कोई नया लाइसेंस बना और न ही रिन्यू किया गया। इससे साल में करीब 50 लाख का घाटा)

    - डोर-टू-डोर कचरा उठाकर (मौजूदा स्थित : पूरे शहर में लागू नहीं)

    - नक्शे पास करके : (मौजूदा स्थित : बोका की बैठकें बेहद कम होती हैं)

    • करीब आठ साल बाद चुनाव हुए हैं। निगम की सारी व्यवस्था बिगड़ी हुई है। अब धीरे-धीरे व्यवस्था बनने लगी है। हम कोशिश कर रहे हैं कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के साथ निगम का राजस्व भी बढ़ाया जाए। हम डोर-टू-डोर कचरा उठाने के एवज में यूजर चार्ज एकत्र करने के साथ अन्य ऐसे संसाधन जुटाने लगे हैं, जिनसे निगम का राजस्व बढ़े। नक्शा प्रक्रिया सरल करने के साथ अन्य टैक्स वसूलने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। -चंद्र मोहन गुप्ता, मेयर, जम्मू नगर निगम