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    Jammu: गली - मोहल्लों में कुत्तों के काटने से डर का माहौल; लोग पूछ रहे क्यों नहीं कम हो रही कुत्तों की आबादी

    By Jagran NewsEdited By: Nidhi Vinodiya
    Updated: Mon, 17 Apr 2023 09:03 PM (IST)

    शहर में कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। रोजाना कुत्तों के काटने से औसतन 20 लोग अस्पताल पहुंचते हैं। शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल के तहत शहर में कुल कुत्तों 45 हजार में से 32 हजार की नसबंदी करवाने का दावा किया जा रहा है>

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    गली - मोहल्लों में कुत्तों की भरमार; लोग पूछ रहे फिर क्यों नहीं कम हो रही कुत्तों की आबादी

    जम्मू, जागरण संवाददाता : शहर में कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। अब भी रोजाना कुत्तों के काटने से औसतन 20 लोग अस्पताल पहुंचते हैं। नगर निगम की तरफ से शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) प्रोग्राम के तहत शहर में कुल कुत्तों 45 हजार में से 32 हजार की नसबंदी करवाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से मोहल्ले में कुत्तों की फौज नजर आ रही है, उससे निगम के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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    काटने के लिए दौड़ते हैं कुत्ते

    जम्मू शहर के जानीपुर, रूपनगर, अंबफला, तालाब तिल्लो, कृष्णा नगर, रेशमघर कॉलोनी, नानक नगर, त्रिकुटा नगर, डिगियाना, गंग्याल, कुंजवानी, सिद्धड़ा, सुंजवां समेत शहर के अधिकतर मोहल्लों में रात में कुत्तों की फौज घूमती नजर आती है। रात में जब मुहल्लों में लोग सो जाते हैं, तो गलियों में इन कुत्तों की फौज निकल पड़ती है। ऐसे में यदि कोई वाहन सवार या कोई व्यक्ति पैदल इन गलियों से निकलता है तो ये कुत्ते लोगों को काटने के लिए दौड़ते हैं। खासकर दोपहिया वाहन देख ये कुत्ते उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं। कई बार वे लोगों को काट भी चुके हैं। सबसे ज्यादा डर छोटे बच्चों को होता है।

    एनिमल बिर्थ कंट्रोल के तहत होती है कुत्तों की नसबंदी 

    ऐसे में अभिभावक उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देते हैं। नगर निगम की तरफ से एबीसी के तहत कुत्तों की बढ़ती आबादी को कम करने के लिए उनकी नसबंदी करने के लिए मार्च 2021 में फ्रेंडिकोज कंपनी से करार किया था। इसके लिए रूपनगर में नगर निगम ने एनिमल मेयर सेंटर बनाया है। यहीं फ्रेंडिकोज कंपनी की तरफ से एसीबी प्रोग्राम के तहत कुत्तों की नसबंदी की जाती है। कंपनी का दावा है कि वह अब तक 32 हजार कुत्तों की नसबंदी कर चुकी है, लेकिन स्थानीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं।

    आक्रामक हो रहे हैं कुत्ते

    लोगों का कहना है कि पांच वर्ष बाद भी मोहल्ले में कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं नजर आ रही है। डाग बाइट के रोजाना आ रहे 20 से ज्यादा मामलेनगर निगम की तरफ से भले ही 32 हजार कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का वादा किया जा रहा हो, लेकिन लोगों की मानें तो डाग बाइट के मामले पहले जैसे ही हैं। विभिन्न मोहल्लों में लोगों से बात करने पर वे बताते हैं कि अब कुत्ते पहले से ज्यादा आक्रामक व्यवहार का प्रदर्शन करने लगे हैं, हालांकि इसकी वजह क्या है, यह किसी को पता नहीं।

    दो बच्चों को कुत्तों ने काट लिया 

    पिछले साल दिसंबर माह में डिगियाना के रानी तालाब में एक महिला और पलौड़ा में दो बच्चों को कुत्तों ने काटा था। इसी तरह रूपनगर, अंबफला, तालाब तिल्लो, कृष्णा नगर, रेशमघर कालोनी, नानक नगर व अन्य मुहल्लों में डाग बाइट के मामले आए। इस वर्ष जनवरी माह में सर्कुलर रोड पर जानीपुर की महिला और गुढ़ा बख्शी नगर में मध्य प्रदेश के एक श्रमिक को कुत्तों ने बुरी तरह काटा। फरवरी में एक युवक को कुत्ते ने इतनी बुरी तरह काटा कि उसे पांच टांके लगाने पड़े। तीन मार्च को नानक नगर के जसबीर सिंह को कुत्ते ने बुरी तरह काटा था। शहर के विभिन्न इलाकों के डॉग बाइट के आंकड़ों पर नजर डालें तो औसतन 20 लोग रोजाना कुत्तों के काटने से अस्पताल पहुंचते हैं।

    नसबंदी कराने से कुत्ते हो जाते हैं चिड़चिड़े 

    नगर निगम ने एक अप्रैल 2021 को एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था। अब तक करीब 32 हजार कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। कुत्तों को पकड़ने के बाद नसबंदी व टीकाकरण करवाकर उन्हें दोबारा उसी जगह छोड़ दिया जाता है। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक किया जा रहा है। नसबंदी होने पर कुछ समय तक कुत्तों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहता है, जो धीरे-धीरे वे सामान्य हो जाता है। इसके बाद वे काटने और भौंकना कम कर देते हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती जाएगी।

    • म्यूनिसिपल वेटनरी आफिसर डा. सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि कुत्तों से बचने के लिए इन बातों का करें पालन
    • सड़क या गली में आवारा कुत्ते को देखकर घबराएं नहीं और भागें नहीं। शांत होकर खड़े हो जाएं।
    • सड़क और कालोनी की गली में बच्चों को अकेला नहीं छोड़ें। कुत्ता काटे तो तुरंत अस्पताल जाएं।
    • कुत्ता आक्रामक व्यवहार दिखाए तो पास नहीं जाएं, धीरे-धीरे पीछे हटें और दूसरा मार्ग अपनाएं।
    • दोपहिया वाहन के पीछे कुत्ता दौड़े तो रुक जाएं, स्पीड बढ़ाने पर वह पीछा कर काट सकता है।