श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। छह साल से अनाधिकृत रूप से अपने कार्यालय से अनुपस्थित जलशक्ति विभाग की एक सहायक कार्यकारी अभियंता (एईई) नुजहत शानू की सेवाओं को प्रदेश सरकार ने शनिवार को समाप्त कर दिया। वह कथित तौर पर कैलिफोर्निया में है। नुजहत शानू वर्ष 2007 में नियुक्त हुई थी और सिर्फ चार वर्ष तक नौकरी करने के बाद वह अवकाश पर चली गई और उसके बाद नहीं लौटी।

श्रीनगर के रावलपोरा में रहने वाले एमएस सलमानी की बेटी नुजहत शानू को वर्ष 2007 में जलशक्ति विभाग में एईई नियुक्त किया गया था। वह वर्ष 2011 में 24 माह के लिए अध्ययन अवकाश पर चली गई। दो साल बाद उसे वापस ड्यूटी पर लौटना था, लेकिन उसने अपने अवकाश में एक साल की बढ़ोतरी का आग्रह किया। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि नुजहत शानू के अवकाश को एक वर्ष के लिए सशर्त विस्तार दिया गया था। उसे कहा गया था कि अवकाश समाप्त होते ही वह तुरंत ड्यूटी पर रिपोर्ट करे और उसे दोबारा अवकाश में विस्तार नहीं मिलेगा। अध्ययन अवकाश में एक वर्ष के विस्तार की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी वह ड्यूटी पर नहीं लौटी और उसने पहली जनवरी 2014 से 29 जून 2014 तक के लिए प्रसूति अवकाश के लिए आवेदन किया। उसे यह अवकाश प्रदान किया गया। इसके बाद उसने पहली जनवरी 2015 से 22 जनवरी 2015 तक भी अवकाश प्राप्त किया। उसने इस अवकाश के लिए आवेदन करते हुए बताया था कि उसे स्वास्थ्य जांच व परिजनों से मिलने के लिए कैलिफोर्निया जाना है।

नुजहत शानू लगातार अपने अवकाश में किसी न किसी बहाने विस्तार के लिए आवेदन करती रहती है। इसके लिए उसे कई बार विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। उसे कईं नोटिस भी जारी किए गए,लेकिन उसने कभी किसी नोटिस का जवाब नहीं दिया। नुजहत शानू को समाचारपत्रों व अन्य माध्यमों से भी ड्यूटी पर लौटने के लिए नोटिस जारी किया गया। उसे जलशक्ति विभाग के सचिवायुक्त के समक्ष 15 दिन में जारी हो,अपना पक्ष रखने के लिए भी कहा गया। उसने इस पर भी कोई सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया और लिखित में अपना पक्ष भेजा। इसमें उसने ड्यूटी से लगातार गैर हाजिर रहने के जो कारण बताए, वह तर्कहीन थे। इसके अलावा उसने विभाग से उसे अपना पक्ष रखने और हाजिर होने के लिए समय सीमा में विस्तार का भी आग्रह किया।

जलशक्ति विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सभी तथ्यों और नियमों के आधार पर पाया गया कि नुजहत शानू सरकारी सेवा की इच्छुक नहीं है। एईई नियुक्त होने के बाद उसने मुश्किल से चार साल तक नौकरी की और उसके बाद वह 2016 तक अवकाश पर ही रही है। वर्ष 2016 में अवकाश की समय सीमा समाप्त होने के बाद उसे दोबारा ड्यूटी पर लौटना था,लेकिन वह तब से गैर हाजिर है। इसलिए संबंधित सेवा नियमों के तहत सभी आवश्यक औपचारिकताओं काे पूरा करते हुए उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई है।  

Edited By: Vikas Abrol