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    Jammu News: आज से तीन माह के लिए बंद होंगे मचैल माता मंदिर के कपाट, बैसाखी के दिन खुलेंगे दरबार के कपाट

    By Jagran NewsEdited By: Jagran News Network
    Updated: Sat, 14 Jan 2023 07:14 PM (IST)

    किश्तवाड़ जिले पाडर इलाके के मचैल गांव में स्थित मां चंडी के कपाट हर साल की तरह इस बार संक्रांति के दिन से तीन महीने के लिए बंद हो जाएंगे। बैसाखी के दिन माता महाकाली की मूर्ति को मंदिर में स्थापित करके मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे।

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    किश्तवाड़ क्षेत्र में प्रसिद्ध मचैल माता का मंदिर l

    किश्तवाड़, जागरण संवाददाता। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में पाडर इलाके के मचैल गांव में स्थित मां चंडी के कपाट हर साल की तरह इस बार भी मकर संक्रांति के दिन यानी कि शनिवार से तीन महीने के लिए बंद हो जाएंगे। अब बैसाखी के दिन माता महाकाली की मूर्ति को मंदिर में स्थापित करके मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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    हर साल मकर संक्रांति को मचैल माता चंडी के दरबार में स्थापित महाकाली की चांदी की मूर्ति को विधि अनुसार वहां से उठाकर मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर मचैल गांव निवासी पहलवान सिंह के घर की छत पर बने लकड़ी के छोटे से मंदिर में स्थापित किया जाता है। जब मूर्ति को बड़े मंदिर से उठाया जाता है तो मंदिर के मुख्य पुजारी देसराज या उनके पुत्र मनोज कुमार पहले मंदिर के कपाट बंद कर देते हैं। अंदर पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति को लाल रंग की चुनरी में लपेट कर अपनी गोद में उठाकर मंदिर के कपाट खोलते हैं और बाहर निकलते हैं।

    पुजारी ही अकेला मंदिर के अंदर दाखिल होता है

    पुजारी के बाहर निकलने का वहां पर गांव के सभी लोग इंतजार कर रहे होते हैं। जैसे ही पुजारी मंदिर से बाहर निकलते हैं तो चारों तरफ माता के जयकारे लगने शुरू हो जाते हैं। आगे-आगे पुजारी चलते हैं और पीछे बाकी लोग जयकारा लगाते हुए चलते हैं। पहलवान सिंह के घर की छत पर बने मंदिर में पुजारी पहुंचते हैं तो वहां भी लोग बाहर ही खड़े रहते हैं।

    सिर्फ अकेला पुजारी मंदिर के अंदर दाखिल होता है और कपाट बंद करके वहां पर कुछ समय के लिए पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति स्थापित कर दी जाती है। मूर्ति स्थापित करने के बाद पुजारी बाहर निकलता है। काफी समय तक वहां पर लोग भजन-कीर्तन करके माता के जयकारे लगाते हैं।

    उसके बाद मुख्य मंदिर में माता चंडी के दरबार के कपाट पर ताला लगा दिया जाता है। लोग माता के जयकारे लगाने के बाद घरों को चले जाते हैं। तीन महीने तक बंद रहने के बाद बैसाखी के दिन ढोल-नगाड़ों के साथ दोबारा वहां लाकर स्थापित किया जाता है।