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    Sant Sammelan : हर पल हर जीव पर रहती है भगवान की नजर, रहें सावधान

    By Lokesh Chandra MishraEdited By:
    Updated: Fri, 29 Oct 2021 05:59 PM (IST)

    हम गलत करें या सही प्रभु की नजर हमारे सभी कामों पर रहती है। इसको हमें कभी नहीं भूलना नहीं चाहिए। संतों ने भक्तों को ज्ञान का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सही ज्ञान होना ही प्रभु की प्राप्ति है।

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    सम्मेलन के तीसरे दिन महापुरुषों ने संगत को समझाया कि ज्ञान और दान का हमारे जीवन में क्या महत्व है।

    आरएसपुरा, संवाद सहयोगी : रामेश्वर धाम में आयोजित संत सम्मेलन के तीसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचन सुने। सम्मेलन के तीसरे दिन महापुरुषों ने संगत को समझाया कि ज्ञान और दान का हमारे जीवन में क्या महत्व है। सही ज्ञान हमें कैसे और किससे मिल सकता है, इसके बारे में भी संतों ने भक्ताें को समझाया। वृंदावन से आए संत प्रकाशानंद जी महाराज, स्वामी स्वरूपनंद जी, स्वामी गोपाल नंद जी महाराज, स्वामी विवेकानंद जी, स्वामी ज्योति गिरी जी महाराज ने संगत को अपने प्रवचनों से निहाल किया।

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    संतों ने प्रवचन कर कहा कि भगवान की नजर हर पल हर जीव पर रहती है। हम बहुत जगह पोस्टर लगे देखते हैं, जहां लिखा होता है कि आप कैमरे की नजर में हैं। उसी तरह हमें याद रखना चाहिए कि हम हर पल, हर क्षण भगवान की नजर में हैं। वो हर पल गलत कार्य करने से पहले और बाद में हमें आगाह करता है, लेकिन यह समझना हमारे विवेक पर निर्भर करता है। हम गलत करें या सही प्रभु की नजर हमारे सभी कामों पर रहती है। इसको हमें कभी नहीं भूलना नहीं चाहिए। संतों ने भक्तों को ज्ञान का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सही ज्ञान होना ही प्रभु की प्राप्ति है। जब तक हमें सही ज्ञान नहीं होगा, हम प्रभु को भी नहीं पा सकते है, लेकिन सही ज्ञान हमें बेहतर गुरु ही दे सकते हैं।

    बिना गुरु के ना तो हमें ज्ञान और न ही हमें प्रभु की प्राप्ति हो सकती है। संतों के प्रवचन सुनकर भक्तों की आंखों से प्रेमभाव के आंसू बहने लगे। स्वामी सुदेश्वर आतम गिरि जी महाराज अमृतसर वाले, स्वामी सर्वदर्शन आचार्य ने भक्तों को दान के महत्व बारे समझाया। उन्होंने कहा कि दान करने से हमारा दायरा बढ़ता है। दान करना भी एक पुण्य है जो हमारे कर्माें में गिना जाता है। उन्होंने भक्ताें को समझाया कि हम सबको प्रयास करना चाहिए कि प्रभु के नाम का कुछ ना कुछ दान करना चाहिए। तीसरे दिन भी काफी संख्या में लोग संतों के प्रवचनों को सुनने के लिए पहुंचे।