जम्मू में सीमा पर दुश्मन से लड़ने के लिए सीमांतवासी भी तैयार, बोले- हम भारतीय सेना के साथ दीवार बनकर खड़े हैं
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सीमांतवासियों ने भी भारतीय सेना की मदद करने के लिए कमर कस ली है। उनका कहना है कि हर बार वे सेना के साथ दीवार बनकर खड़े हुए हैं। अब भी हम तैयार हैं

रमण शर्मा, अखनूर। पहलगाम आतंकी हमले से उपजे हालात में सीमांतवासियों ने भी भारतीय सेना की मदद करने के लिए कमर कस ली है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसने वाले लोगों में खासी संख्या में पूर्व सैनिक व अन्य बलों से सेवानिवृत्त कर्मी बसते हैं। उन्हें सीमा की सुरक्षा का खासा अनुभव है।
मौजूदा हालात को देख उन्होंने सेना को अभी से सहयोग देने के लिए हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया है। चिनाब दरिया किनारे स्थित परगवाल गांव के राम स्वरूप शर्मा का कहना है कि विभाजन के बाद से पाकिस्तान ने कई बार सीमांतवासियों का हौसला आजमाया है।
हर बार वे सेना के साथ दीवार बनकर खड़े हुए हैं। अब भी हम तैयार हैं। अगर पाकिस्तान फिर बड़ी शरारत करता है तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी। हम में काफी ऐसे हैं जिन्होंने सेना, सुरक्षाबलों में रहते हुए युद्ध लड़ने के साथ पाकिस्तान के आतंक का सामना किया है।
'सहयोग देना हमारा फर्ज'
बट्टल के सुरेश शर्मा का कहना है कि हमेशा हमारी रक्षा करने वाली सेना को सहयोग देना हमारा फर्ज है। जरूरत पड़ने पर हम भी देश के लिए बंदूक उठा सकते हैं। जिस दिन से पहलगाम हमला हुआ है उस दिन हमारे गांव में लोग बहुत दुखी थे। हम भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन का मुकाबला करने के लिए खड़े हैं। हमने सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को बचाने के लिए बनाए गए बंकरों की सफाई भी कर ली है।
'हमने खाने-पीने का सामान इकट्ठा कर लिया है'
अगर युद्ध के हालात बनते हैं तो गांव की महिलाएं सेना के लिए खाने पीने का बंदोबस्त करेंगी। प्लांवाला के पंचतूत के रविंद्र सिंह का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने कई बार युद्ध वाले हालात देखें हैं। हमने खाने पीने का सामान एकत्र कर लिया है। सीमांतवासियों को अपनी सेना पर पूरा यकीन है।
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