जम्मू, राज्य ब्यूरो। कश्मीर और लद्दाख में पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों को देखते हुए रेल और सड़क ढांचे के विकास की राह पर केंद्र सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मनाली-लेह राजमार्ग पर अटल टनल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण के बाद अगली अच्छी खबर जम्मू कश्मीर में कटड़ा-बनिहाल रेल लिंक के लिए अहम 8.6 किलोमीटर लंबी सुरंग की खोदाई का कार्य पूरा कर लिया गया है। पीर पंजाल क्षेत्र की पहाड़ियों को चीरकर इस टनल की खोदाई में ही 10 साल लग गए।
यह सुरंग 272 किलोमीटर लंबे
ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे लाइन पर रामबन जिले में चंगलदार व खैरी के बीच स्थित है। अपेक्षा है कश्मीर 15 अगस्त 2022 तक देश से सीधे रेलमार्ग से जुड़ जाएगा। फिलहाल कटड़ा से बनिहाल के रेल लिंक पर तेजी से कार्य चल रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इस मार्ग पर 74 नंबर सुरंग का काम एफकान और एबीसीआइ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां कर रही हैं। सुरंग निर्माण के आखिरी 2.5 किलोमीटर हिस्से की खोदाई का कार्य एबीसीआइ इंफ्रा ने तीन साल में पूरा किया। रामबन के जिला विकास आयुक्त नजीम जिया खान ने बताया कि 8.6 किलोमीटर लंबी रेलवे सुरंग 16 किलोमीटर लंबे खरी-बनिहाल सेक्शन को जोड़ेगी।
सुरंग की खोदाई करने का काम पूरा होने पर खान ने उत्तरी रेलवे और संबंधित कंपनियों को बधाई देते हुए कहा कि सुरंग के अंदर का शेष बचा कार्य जल्द ही पूरा हो जाएगा। इससे निर्धारित समय के भीतर यह प्रोजेक्ट पूरा होगा। अगस्त में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 27949 करोड़ के ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। उन्होंने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शेष बचे कटड़ा-बनिहाल के बीच कार्य को 15 अगस्त 2022 तक पूरा किया जाए।
इसी मार्ग पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल
ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेललिंक में से ऊधमपुर से कटड़ा और काजीगुंड-श्रीनगर-बारामुला तक कार्य पूरा हो चुका है। अब कटड़ा से बनिहाल प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है। चिनाब नदी और पीरपंजाल की पहाडिय़ों से गुजरने वाली रेल लाइन दक्षिण एशिया की सबसे मुश्किल परियोजना है। यह रेलमार्ग करीब 37 टनल और 27 पुलों से होकर गुजरेगा। रियासी जिले में चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचे (359 मीटर) आर्क पुल का निर्माण भी तेजी से चल रहा है।
बनिहाल व काजीकुंड (अनंतनाग) के बन रही पीरपंजाल टनल 11 किलोमीटर लंबी होगी और जम्मू क्षेत्र को कश्मीर से जोड़ेगी। इसका निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि बर्फबारी का रेलवे ट्रैक पर बहुत कम प्रभाव हो।
डिस्क्लेमर - इस खबर में पहले अटल टनल की गलत फोटो लगी थी। जांच में इसका पता चलने पर, जागरण की संपादकीय नीतियों का पालन करते हुए अटल टनल की सही फोटो लगाई गई है।





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