श्रीनगर, जेएनएन। पुलिस ने भी कभी यह नहीं सोचा होगा कि हिजबुल मुजाहिदीन के जिस मोस्ट वांटेड टॉप कमांडर की पिछले नौ सालों से तलाश कर रही है, वह स्वयं उनके चंगुल में फंस जाएगा। हालांकि पुलिस ने आतंकी मेहराजुद्दीन हलवाई उर्फ उबैद निवासी सोपोर को जिंदा पकड़ने की पूरी कोशिश की परंतु ऐसा नहीं हो सका। पुलिस स्वयं यह बात मानती है कि भले मेहराजुद्दीन 12वीं पास था परंतु संचार के आधुनिक संसाधनों की जितनी जानकारी उसे थी, शायद ही किसी और आतंकी को हो। अपनी इसी कुशलता की वजह से वह पुलिस व सेना की पकड़ा से इतने साल बचते आ रहा था।

मोस्ट वांटेड सूची में चौथे स्थान पर था मेहराजुद्दीन: उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुला का रहने वाला हिजबुल ग्रुप कमांडर मेहराजुद्दीन सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल दस आतंकियों की सूची में चौथे नंबर पर था। 12वीं पास मेहराजुद्दीन हलवाई को सुरक्षाबल बुरहान वानी से कम नहीं आंकते थे। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार का कहना है कि जिस तरह दक्षिण कश्मीर में कई नागरिकों-सुरक्षाबलों की हत्याओं में शामिल था, उसी तरह मेहराजुद्दीन भी उत्तरी कश्मीर में कई नागरिकों-सुरक्षाबलों की हत्याओं में शामिल रह चुका था। सोपोर के खुशालमट्टू गांव का रहने वाले मेहराजुद्दीन हलवाई को सुरक्षाबलों ने मोस्ट वांटेड सूची में डबल-ए श्रेणी में रखा था। करीब 36 वर्षीय मेहराजुद्दीन वर्ष 2015 के अंत तक उत्तरी कश्मीर में पूरी तरह सक्रिय हो चुका था। सुरक्षाबलों ने जब उसकी धरपकड़ का सिलसिला तेज किया तो वह कुछ सालों के लिए पाकिस्तान में जा छिपा था। उसके वापस लौटने पर ही वर्ष 2019 में सुरक्षाबलों ने उसे अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया।

कई हत्याओं में रह चुका था शामिल : हिजबुल कमांडर मेहराजुद्दीन कई हमलों में शामिल रह चुका था। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज किए गए थे। वह 28-07-2013 को उन्टू हमाम सोपोर के एसपीओ मुदासिर अहमद डार की हत्या, 26-07-2013 को क्रैंकशिवन के सरपंच खजीर मोहम्मद परे पर हमला, गोरीपोरा बोमई के सरपंच हबीबुल्लाह मीर की हत्या, हार्डशिवा सोपोर की पंच जुना बेगम पर भी हमला, उसी ने करवाया था । यही नहीं उसी ने 26-04-2013 को ह्यगाम सोपोर में अपने साथियों के साथ पुलिस दल पर हमला किया था, जिसमें चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। हमले के बाद वे तीन पुलिसकर्मियों के हथियार भी अपने साथ ले गए। हुर्रियत कार्यकर्ता इकबाल नगर सोपोर के शेख अल्ताफ-उर-रहमान और बोमई सोपोर के खुर्शीद अहमद भट, बादामबाग सोपोर के पूर्व आतंकवादी मेहराज-उद-दीन डार और मुंडजी सोपोर के एजाज अहमद रेशी की हत्या भी उसी ने की थी। इसके अलावा वह होटल हीमाल श्रीनगर सहित अन्य कई हमलों में भी शामिल रह चुका था।

संचार के आधुनिक साधनों की भी थी पूरी जानकारी : पुलिस इसलिए हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर मेहराजुद्दीन का मुठभेड़ में मारा जाना बड़ी कामयाबी मान रही है क्योंकि वह उनके लिए चुनौती बना हुआ था। ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को काफी हद तक ध्वस्त कर पुलिस ने आतंकी संगठनों को नुकसान पहुंचाया है परंतु घाटी में पिछले 9 सालों से सक्रिय मेहराजुद्दीन अपनी चतुरता और आधुनिक संसाधनों की बेहतर जानकारी की वजह से कभी भी उनकी पकड़ में नहीं आ रहा था। पुलिस भी यह मानती है कि मेहराजुद्दीन संचार के आधुनिक साधनों से अच्छी तरह परिचित था। वह उन्हीं संसाधनों की मदद से बिना पुलिस की पकड़ में आए अन्य आतंकियों के साथ संवाद करता था। विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाता और उन्हें अंजाम देता था। यही नहीं इंटरनेट मीडिया की पूरी जानकारी रखने वाला मेहराजुद्दीन उसी की मदद से युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करने के लिए प्रेरित करता। यही नहीं इन्हीं संसाधनों की मदद से वह आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए धन भी जुटाया करता रहा था।

(डिस्क्लेमर - 7 जुलाई की सुबह उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर मेहराजुद्दीन हलवाई उर्फ उबैद को मार गिराया था। खबर में मेहराजुद्दीन की जगह गलती से उमर हुसैन की फोटो लग गई थी। ब्रिटेन निवासी उमर हुसैन ISIS समर्थक है। सही तथ्य का पता चलने पर खबर को सांकेतिक फोटो लगाकर अपडेट किया गया है।)

Edited By: Rahul Sharma