नई दिल्ली, जेएनएन। चार विश्व कप, चार ओलंपिक और इतने ही चैंपियंस ट्रॉफी एवं एशियन गेम्स खेलने वाले दिग्गज भारतीय हॉकी खिलाड़ी और पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै को देश में हो रहे हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम से काफी उम्मीदें हैं। पिल्लै मनप्रीत की कप्तानी वाली भारतीय टीम को अतिआत्मविश्वास से हटकर खेलने की सलाह दे रहे हैं। विश्व कप में भारतीय टीम की संभावनाओं और चुनौतियों पर धनराज पिल्लै से विकास पांडेय ने खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:

सवाल- घर में विश्व कप हो रहा है। भारतीय टीम से कितनी उम्मीदें हैं और भारत की तैयारियों को लेकर क्या कहेंगे ?

जवाब- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के बाद भारतीय टीम भुवनेश्वर के उसी कलिंगा स्टेडियम के मैदान पर अभ्यास कर रही है जहां विश्व कप के मुकाबले होने हैं। मुझे नहीं लगता कि हॉकी इंडिया और ओडिशा सरकार ने कोई काम अधूरा छोड़ा होगा। भारतीय खिलाड़ियों की जो मांग थी या कोचिंग स्टाफ की जैसी मांग थी, वे सभी पूरी की गई हैं। भारत काफी अच्छी तैयारी के साथ विश्व कप में उतरने जा रहा है। मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने टीम की तैयारियों को अच्छे से अंजाम दिया है।

सवाल- क्या भारत को घरेलू मैदान का फायदा मिलेगा?

जवाब- मैं चार विश्व कप खेल चुका हूं। यह विश्व कप थोड़ा अलग होगा। अब तक 12 टीमें खेलती थीं, लेकिन इस बार विश्व कप में 16 टीमें भाग ले रही हैं। भारत घरेलू दर्शकों के सामने खेलने वाला है। इसका उसे फायदा भी है और नुकसान भी है। आप अगर अच्छा खेलोगे तो दर्शक आपको कंधे पर उठा लेंगे, लेकिन खराब खेलोगे तो उसके विपरित नतीजे भी देखने को मिल सकते हैं। घरेलू दर्शकों के सामने अच्छा खेलने का दबाव होता है और अगर आप अच्छा नहीं खेलते हैं तो उन्हीं दर्शकों से आपको कई तरह की आलोचना सुननी पड़ सकती है। लोग कहेंगे कि यह टीम अच्छी नहीं है, इसे हटा दो, नई टीम बनाओ, तमाम तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। मैच दर मैच आप अगर जाओगे तो आप क्वार्टर फाइनल तक आसानी से पहुंच सकते हो। ना कम ना ज्यादा, लेकिन भारतीय टीम को कम से कम क्वार्टर फाइनल तक आना ही चाहिए।

सवाल- अक्सर देखा गया है कि भारतीय टीम अतिआत्मविश्वास की वजह से मैच गंवा देती है। इससे कैसे निजात पाई जाए ?

जवाब- पिछले दो वर्षो से अगर आप भारत के प्रदर्शन को देखें तो वह चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पेनाल्टी शूटआउट में हारा, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी या एशियन गेम्स देख लीजिए, हम अच्छा ही खेल रहे हैं। लेकिन, एशियन गेम्स में एक मैच ने बहुत कुछ सिखा दिया। टीम के कुछ खिलाड़ियों में यह भावना जग गई थी कि हम फाइनल में आसानी से पहुंच जाएंगे। अगर आप अतिआत्मविश्वास से भरे हैं तो टीम खत्म हो जाती है। मलेशिया के खिलाफ भी यही हुआ।

सवाल- क्या आपके समय में भी भारतीय टीम को कभी अतिआत्मविश्वास का खामियाजा भुगतना पड़ा ?

जवाब- मैं जब भी भारत के युवा हॉकी खिलाड़ियों से मिलता हूं तो उनसे अपने सिडनी ओलंपिक 2000 का अनुभव साझा करता हूं। तब पोलैंड के खिलाफ मुकाबले में हम 1-0 से आगे चल रहे थे और खेल खत्म होने में दो मिनट से भी कम का समय शेष था। अगर हम जीत जाते या फिर दो-दो से मुकाबला ड्रॉ रहता तब भी हम सेमीफाइनल में पहुंच जाते, लेकिन तभी हम एक गोल खा बैठे और स्कोर 1-1 की बराबरी से समाप्त हुआ और हम टूर्नामेंट से बाहर हो गए। वह मेरे करियर का सबसे खराब दिन था। हरेंद्र सिंह एंड कंपनी को यह सब बिलकुल ही नहीं सोचना है। उन्हें एक तरफा जीत दर्ज करके आगे बढ़ते जाना है। हमें हर मैच से तीन अंक हासिल करने के बारे में सोचना चाहिए।

सवाल- भारत को पूल-सी में बेल्जियम, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। क्या यह एक आसान पूल है ?

जवाब- देखिये, विश्व कप, ओलंपिक, चैंपियंस ट्रॉफी या एशियन गेम्स जैसे टूर्नामेंट में अलग तरह की चुनौती देखने को मिलती है। बेल्जियम ओलंपिक की उप विजेता टीम है। पिछले तीन-चार वर्षो में बेल्जियम की टीम ने अपने आप को दुनिया की शीर्ष दो या तीन टीमों में बनाए रखा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि ऑस्ट्रेलिया अच्छी टीम है, लेकिन आज के समय में भारत उसे बढ़िया टक्कर दे रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी देख लीजिए या फिर कोई भी बड़ा टूर्नामेंट देख लीजिए, भारत ने उसे अच्छी टक्कर दी है। लेकिन, अगर आप ये कहेंगे कि हम जीत ही जाएंगे तो यह ठीक नहीं होगा। विश्वास के साथ खेलो, ना कि अतिआत्मविश्वास के साथ।

सवाल-  भारतीय टीम को सरदार सिंह, रुपिंदर पाल सिंह, रमनदीप सिंह और एसवी सुनील की कितनी कमी खलेगी ?

जवाब- अगर मुझे भारतीय टीम का चयन करने के लिए कहा जाता तो मैं अपनी विश्व कप की टीम में सरदार सिंह को रखता। एसवी सुनील व रमनदीप चोट की वजह से विश्व कप की टीम से बाहर हो गए। रुपिंदर पाल भी टीम में नहीं है। शुरुआती लाइन-अप के मुख्य चार खिलाड़ी हमारी टीम में नहीं है। सुनील का फायदा यह था कि वह गेंद को तेजी से लेकर आगे बढ़ता भी था और वह सबसे तेज भागने वाला खिलाड़ी भी था। कई बार वह दूसरे खिलाड़ियों के लिए गोल करने के मौके भी तैयार करता था। हालांकि, श्रीजेश, मनप्रीत और हरमनप्रीत जैसे खिलाड़ी हैं जिन्हें अच्छा अनुभव है।

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Posted By: Pradeep Sehgal