ऊना में मिनी ठेकों पर धड़ल्ले से बिक रही मिलावटी शराब, कैसे बिगाड़ रही कारोबारियों का खेल?
ऊना जिले में अवैध शराब की बिक्री से कारोबारी परेशान हैं। मिनी ठेकों पर अवैध बिक्री और सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी जारी है। चंडीगढ़ और हरियाणा से शराब लाई जा रही है पर नेता और जनता उदासीन हैं। सस्ती शराब के चक्कर में लोग अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं और कारोबारियों में विवाद हो रहे हैं।

चंचल बाली, ऊना। जिला ऊना शराब की अवैध रूप से बिक्री की जा रही है। अवैध शराब की बिक्री रोकने को लेकर कारोबारियों द्वारा ढावों, मिनी ठेकों की जांच के दौरान आए दिन विवाद हो रहा है।
शराब कारोबारियों का कहना है कि करोड़ो रूपए खर्च करके शराब की दुकाने ली हैं, लेकिन मिनी ठेकों में शराब की हो रही बिक्री से उन्हें आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा है।
बेशक पुलिस प्रशासन की तरफ से शराब माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। बावजूद इसके शराब माफिया बदस्तूर अन्य राज्यों से शराब की तस्करी करने में जुटा हुआ है।
जिला में सबसे ज्यादा मिनी ठेकों पर शराब अवैध रूप से बिकती है। मिनी ठेके का अर्थ है कि लोग शराब को थोक में खरीद कर उसमें मिलावट कर उसकी घर व दुकानों में परचून में बिक्री करते हैं।
कई बार शराब माफिया पुलिस की गिरफ्त में आया है, लेकिन उससे बरामद की गई शराब की मात्रा अधिक नहीं होती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की सबसे अधिक तस्करी हो रही है। यह गैरकानूनी धंधा बंद नहीं हो पाया है।
चंडीगढ़ व हरियाणा से शराब अवैध रूप से जिला में लाई जा रही है। शराब माफिया से जुड़े लोग पंजाब व जिला की सीमाओं से सटे वैकल्पिक रास्तों से होकर प्रवेश करते हैं।
इस कारण चौकी व थाना स्तर भी पुलिस को माफिया के संबंध में भनक नहीं लग पाती है। यही कारण है कि शराब माफिया अपने अवैध धंधे को अंजाम देने में जुटा है।
जिला में अन्य राज्यों से शराब अवैध रूप से लगातार पहुंचती है लेकिन इसके खिलाफ शायद ही कोई नेता आवाज उठाता है।
नेताओं को महज अपने क्षेत्र के विकास कार्यो समेत अन्य कामों से फुर्सत नहीं मिलती है। मिलावटी शराब के मामले में आम लोग व जनप्रतिनिधि भी कम दोषी नही हैं। लोग व जनप्रतिनिधि इस मामले में कभी आवाज नहीं उठाते हैं।
सीमावर्ती कस्बों में शराब के धंधे से जुड़ा माफिया पड़ोसी राज्य चंडीगढ़ व हरियाणा से शराब की खेप पहुंचता है। चौंकाने वाली बात यह है कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली शराब को खुद वहां का माफिया यहां पर डिलीवर करता है।
साथ में हिमाचल में बनने वाली शराब के लेबल को दो नंबर में बनाकर यहां के माफिया को देकर जाता है। ऐसे में यदि अन्य राज्य की शराब को जिला समेत अन्य जगह पर पुलिस पकड़ भी ले तो महज आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज होगा।
इसके विपरीत यदि अन्य राज्य की शराब बरामद होती है तो पुलिस अन्य राज्य की शराब के आधार पर कार्रवाई को अंजाम देती है।
सरकार की तरफ से एक्साइज विभाग से लाइसेंस युक्त शराब की दुकानें खोली गई हैं। इन दुकानों में शराब के कारखानों से शराब पहुंचती है।
प्रतिदिन शराब पीने के आदी कई लोग शराब की दुकानों पर महंगी शराब पीने से कतराते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को जिला के कई गांवों में दुकानों व घरों में सस्ती शराब आसानी से मिल जाती है।
सस्ती शराब के चक्कर में लोग अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ढाबों व दुकानों में मिल जाता है।
आलम यह है कि रोजाना शराब पीने वालों को महज 10 रुपये में भी शराब का गिलास ढाबों व दुकानों में मिल जाता है। शराब की सरकारी दुकानों पर इस तरह की सुविधा नहीं मिलती है।
ऐसा भी नहीं है कि शराब माफिया के संबंध में पुलिस अनभिज्ञ है। कई जगह पर तो पुलिस जानबूझ कर इस तरफ अधिक ध्यान नहीं देती है।
महज पुलिस के आला अधिकारियों की नजर में अपराध दर को कायम रखने के लिए यदा-कदा छापामारी जरूर की जाती है।
अवैध शराब की बिक्री को लेकर ऊना जिला में कई मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। बसाल गांव में शराब कारोवारी के करिंदों व एक ढाबा संचालक के बीच तलवारें व तेजधार हथियारों का जमकर प्रयोग किया गया।
जिसमें तीन लोग गंभीर रूप सेे घायल हुए थे। इसके अलावा मनोहर मार्केट नारी में भी अवैध शराब की बिक्री को लेकर जमकर तेजधार हथियार चले थे।
वीरवार रात ऊना मुख्यालय के समीप ढावे में अवैध शराब की बिक्री की सूचना के बाद शराब कारोवारी के करिंदे जब मौका पर पहुंचे तो विवाद हो गया। इसके अलावा जिला में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
ऊना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि जिला में अवैध शराब की बिक्री करने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने अभियान शुरू किया है।
पड़ोसी राज्यों से बिना दस्तावेज के आने वाली शराब को कई बार पकड़ा जा चुका है। इसके अलावा पुलिस की टीमें थाना व चौकी स्तर पर माफिया के खिलाफ कार्रवाई करती रहती हैं।
यदि किसी जगह पर अन्य राज्य की शराब की तस्करी हो रही है तो उसके संबंध में पुलिस को सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले का नाम व पता गुप्त रखा जाएगा।
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