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    हिमाचल में बदले शिक्षक पुरस्कार के नियम, छात्रों के प्रदर्शन पर मिलेगा अवॉर्ड; 15 जुलाई तक करें आवेदन

    Updated: Wed, 02 Jul 2025 03:26 PM (IST)

    सोलन में राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों का चयन अब उनके छात्रों के प्रदर्शन पर आधारित होगा। शिक्षा विभाग ने चयन प्रक्रिया में बदलाव किया है जिसके तहत आवेदन करने वाले शिक्षकों के छात्रों की परीक्षा ली जाएगी। छात्रों के अच्छे प्रदर्शन से शिक्षकों को अंक मिलेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई है।

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    विद्यार्थियों की परफॉर्मेंस पर निर्भर होगा राज्य शिक्षक पुरस्कार - A

    नेहा शर्मा, सोलन। प्रदेश में राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाले अध्यापकों की परफॉर्मेंस बच्चों से पता लगाई जाएगी। विभाग ने पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन करने के लिए नया तरीका निकाला है। यह तरीका अध्यापकों की दक्षता की जांच करेगा। इससे पहले राज्य शिक्षक अवॉर्ड के लिए अध्यापकों की ओर से किए गए कार्यों के आधार पर चयन होता था, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया।

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    आवेदन करने वाले अध्यापकों द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थियों के टेस्ट लिए जाएंगे। टेस्ट में यदि विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो नंबर आवेदन करने वाले अध्यापकों को मिलेंगे। सोलन में भी शिक्षकों से अधिक आवेदन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि योग्य शिक्षक सम्मानित हो सकें।

    दूसरी ओर राज्य पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई है। इस अवधि में ही अध्यापक ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। इसके बाद शिक्षा विभाग आगामी कार्रवाई करेगा और विद्यार्थियों की परीक्षा लेने की तिथि निर्धारित की जाएगी।

    पहले शिक्षक पुरस्कार सेवा अवधि, नवाचार, शिक्षण में योगदान आदि मापदंडों पर आधारित था, लेकिन अब छात्रों की शैक्षणिक प्रगति भी चयन में महत्वपूर्ण होगी। इससे शिक्षकों को बच्चों को बेहतर पढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

    वहीं, उच्च शिक्षा विभाग सोलन के उपनिदेशक गोपाल चौहान ने बताया कि सोलन में भी शिक्षकों को आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि जिले से अधिक से अधिक योग्य शिक्षक इस पुरस्कार के लिए नामित हो सकें। पिछले वर्ष आवेदन की संख्या विशेष रूप से महिला शिक्षकों से काफी कम देखी गई थी। वहीं गैर-चिकित्सा, चिकित्सा, विज्ञान व्याख्याताओं का प्रतिनिधित्व भी कम था। इसे देखते हुए जिलाभर के शिक्षकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।