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    कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का प्रबंधन भारी

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 22 Dec 2020 05:10 PM (IST)

    पंचायती राज व निकाय चुनाव के लिए चुनाव आयोग की घोषणा के बाद अब उम्मीदवारा

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    कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का प्रबंधन भारी

    सुनील शर्मा, सोलन

    पंचायती राज व निकाय चुनाव के लिए चुनाव आयोग की घोषणा के बाद अब उम्मीदवारों ने प्रचार का भी श्रीगणेश कर दिया है। आयोग की घोषणा के बाद संभावित उम्मीदवारों की कदमताल बढ़ गई है और देर रात तक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कोई अपनी पत्नी की पैरवी करने के लिए नेताओं के पास हाजिरी भरने पहुंच रहा है तो कोई जनता के बीच राजनीतिक जमीन ढूंढता पहुंच रहा है। वहीं, जिला की युवा शक्ति इंटरनेट मीडिया को ही अपनी जीत का आधार मान चुकी है।

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    नए परिसीमन और रोस्टर के मुताबिक अब जिला सोलन में तीन नगर परिषद व दो नगर पंचायतों की 41 सीटों के लिए जोड़तोड़ का दौर चल रहा है। इसके साथ ही जिला में 240 पंचायतों में 191 पंचायतें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जिला सोलन का अधिकतर हिस्सा अब तक कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षो से भाजपा की रणनीति कांग्रेस पर भारी पड़ती जा रही है। जिला में अब तक कई विजेता प्रत्याशी कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों पर कमजोर पड़ती नेताओं की पकड़ कांग्रेस को बड़ा झटका भी दे सकती है।

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    यहां रोचक है मुकाबला

    जिला सोलन का सबसे रोचक मुकाबला इस दफा बद्दी नगर परिषद में होने वाला है। यहां करीब 20 साल के बाद कांग्रेस के गढ़ में भाजपा ने कमल खिलाने में कामयाबी हासिल की थी। दून यानी बद्दी क्षेत्र में चौधरी परिवार का एक छत्र राज भाजपा तोड़ तो चुकी है, लेकिन अब एक बार फिर चौधरी परिवार निकाय चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी टक्कर के रूप में सामने हो सकता है। गौर हो कि एकमात्र जीत भी भाजपा को कांग्रेस का पार्षद तोड़ने के बाद ही मिली थी। पहली बार विजय हासिल करने के बाद भाजपा ने यहां अपने प्रत्याशियों को कांग्रेस से दो कदम पहले ही मैदान में उतार दिया है, जबकि कांग्रेस अपनी खोई हुई इस नगर परिषद पर सोच समझकर ही पांव रखना चाहती है।

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    निकाय चुनाव में 41 में से 19 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

    जिला सोलन में निकाय चुनाव के लिए कुल 41 सीटे हैं, जिनमें से 19 महिला आरक्षित हैं। सोलन को निगम का तोहफा मिलने के बाद अब तीन नगर परिषदें परवाणू, बद्दी और नालागढ़ शेष रह गई हैं। इसके साथ ही दो नगर पंचायतें अर्की व कंडाघाट शामिल हुई हैं। जिला की तीनों नगर परिषदों में नौ-नौ सीटें हैं और सभी का चुनावी रोस्टर लगभग एक जैसा है। सभी परिषदों में चार-चार सीटें महिलाओं के आरक्षित हैं, जबकि कंडाघाट नगर पंचायत की कुल सात सीटों में से चार महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। अर्की नगर पंचायत में सात में से तीन सीटें महिला आरक्षित की गई हैं। पहली बार नगर पंचायत बनी कंडाघाट में अध्यक्ष की सीट भी महिला के लिए आरक्षित है। नगर परिषद नालागढ़ में भी इस बार अध्यक्ष की कुर्सी महिला आरक्षित कर दी गई है।

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    कांग्रेस का गढ़ जिला सोलन

    जिला सोलन में सोलन, दून या फिर नालागढ़ या अर्की की बात करें तो सभी स्थानों पर अब तक कांग्रेस भाजपा पर भारी रही है। ऐसे में अब कांग्रेस को अपनी मजबूती बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगानी होगी। वहीं, भाजपा को सही उम्मीदवारों का चयन करना होगा। नालागढ़ में लखविद्र राणा दूसरी बार विधायक बनकर मैदान में डटे हुए हैं। वहीं, सोलन में डा. राजीव बिंदल के सिरमौर चले जाने के बाद भाजपा का आधार खिसक गया है। ऐसे में अब सोलन में कांग्रेस ने भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया है। वहीं अर्की में इन दिनों भाजपा की गुटबाजी का कांग्रेस को लाभ मिल सकता है। हालांकि परवाणू में दोनों ही पार्टियों की मिलीजुली सरकार रही है।