चेक बाउंस मामले मे हर्जाने की 20 फीसद राशि 90 दिन में देने की छूट का अपीलीय अदालत के पास शक्तियां नहीं
हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामलो में स्पष्ट किया कि अपीलीय अदालत के पास कोई शक्तियां नहीं है कि वह दोषी को जुर्माने अथवा हर्जाने की 20 फीसदी राशि कोर्ट में जमा कराने के लिए 90 दिनों से अधिक का समय दे। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने फैसले में कहा कि कानून में अधिकतम समय सीमा 90 दिनों की है इसलिए ऐसा करना कानून के प्रावधानों में हस्तक्षेप के बराबर होगा।

विधि संवाददाता, शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामलो में महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि अपीलीय अदालत के पास कोई शक्तियां नहीं है कि वह दोषी को जुर्माने अथवा हर्जाने की 20 फीसदी राशि कोर्ट में जमा कराने के लिए 90 दिनों से अधिक का समय दे। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने फैसले में कहा कि कानून में अधिकतम समय सीमा 90 दिनों की है इसलिए ऐसा करना कानून के प्रावधानों में हस्तक्षेप के बराबर होगा।
प्रार्थी को हर्जाने की 20 फीसदी राशि जमा करवाने की शर्त रखी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह शक्तियां तो हाईकोर्ट के पास भी नहीं है, इसलिए ऐसा करने से वैधायी क्षेत्र में अतिक्रमण हो जाएगा। मामले के अनुसार प्रार्थी को चेक बाउंस के मामले में न्यायायिक दंडाधिकारी ने 5 लाख रुपए हर्जाने और 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के खिलाफ उसने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पांवटा साहिब के समक्ष अपील दायर की थी। न्यायिक दंडाधिकारी के आदेशों पर रोक लगाते हुए अपीलीय अदालत ने प्रार्थी को हर्जाने की 20 फीसदी राशि जमा करवाने की शर्त रखी।
प्रार्थी कोर्ट द्वारा दिए समय पर यह राशि जमा नहीं करवा पाया। प्रार्थी ने समय सीमा बढ़ाने की गुहार भी लगाई थी जिसे अपीलीय अदालत ने खारिज कर दिया था। अपीलीय अदालत के इस फैसले के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
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