पाकिस्तान का साथ देना पड़ा महंगा, तुर्किये से सेब आयात बंद करने की मांग; अब रोहित ठाकुर की आई प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश में तुर्किये से सेब के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग बढ़ रही है। कांग्रेस प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने यह मुद्दा उठाया था जिसके बाद कई मंत्रियों ने भी इस पर अपनी राय रखी। मंत्रियों का कहना है कि तुर्किये ने भारत-पाक तनाव के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी। हिमाचल में सेब की 5 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था है।

राज्य ब्यूरो, शिमला। सेब राज्य हिमाचल में तुर्किये से आयात होने वाले सेब पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता व ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने यह मामला उठाया था।
उसके बाद राज्य लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान व अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया जारी कर आयात पर रोक लगाने की मांग की है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि तुर्किये ने भारत पाक के बीच चल रहे तनाव के दौरान दुश्मन देश की मदद की है। ऐसे में सेब आयात पर पूर्णत: रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि तुर्की में आए महाविनाशकारी भूकंप के बाद भारत मदद करने वाले पहले देशों में से एक था। इस दौरान भारत की ओर से ऑपरेशन दोस्त अभियान चलाकर तुर्की के लोगों की मदद की गई थी।
सेब उत्पादक ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र
ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत ने तुर्की में जाकर न केवल लोगों को बचाया था, बल्कि बड़ी तादाद में राहत सामग्री भेजी थी। लेकिन जब भारत ने आतंक के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया तो तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया।
हिमाचल के बागबान पिछले काफी समय से विदेशों से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग को नजरअंदाज किया जाता रहा है। अब एक बार ये मांग जोर पकड़ने लगी है। बीते रोज हिमालयन सेब उत्पादक सोसायटी ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था।
हिमाचल में 5 हजार करोड़ की आर्थिकी सेब से
हिमाचल में 5 हजार करोड़ की आर्थिकी सेब से जुड़ी है। प्रदेश के 8 जिलों में सेब का उत्पादन होता है। इसमें 65- 70 प्रतिशत सेब शिमला जिला में होता है। इसके अलावा कुल्लू, किन्नौर, मंडी जिला में भी सेब का अच्छा उत्पादन होता है। बाहरी देशों से सेब आयात होने से हिमाचल के सेब को कम दाम मिल रहे हैं।
तुर्की से सेब आयात के आंकड़े टन में
- वर्ष 2015-16, 205 टन
- वर्ष 2016-17, 3636 टन
- वर्ष 2017-18, 7430 टन
- वर्ष 2018-19, 16028 टन
- वर्ष 2019-20, 32290 टन
- वर्ष 2020-21, 43674 टन
- वर्ष 2021-22, 93901 टन
- वर्ष 2022-23, 107,220 टन
- वर्ष 2023-24, 117623 टन
आयात करोड़ों में
2021-22, 563 करोड़
2022-23, 739 करोड़
2023-24, 821 करोड़
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