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    Himachal News: शिमला नगर निगम के चुनाव का रास्ता साफ, राज्य चुनाव आयोग ने वापस ली सुप्रीम कोर्ट से याचिका

    Himachal News नगर निगम शिमला के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मामले पर सुनवाई होनी थी। इससे पहले राज्य चुनाव आयोग की ओर से केस वापस लेने की अर्जी कोर्ट में दायर कर दी गई।इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

    By Jagran NewsEdited By: Jagran News NetworkUpdated: Tue, 14 Feb 2023 09:57 PM (IST)
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    शिमला में स्थित नगर निगम l जागरण आर्काइव फोटो

    शिमला, जागरण संवाददाता। नगर निगम शिमला के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मामले पर सुनवाई होनी थी। इससे पहले राज्य चुनाव आयोग की ओर से केस वापस लेने की अर्जी कोर्ट में दायर कर दी गई। इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

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    अब उम्मीद है कि कुछ दिन में आयोग नगर निगम चुनाव को लेकर निर्देश जारी कर सकता है। इसमें मतदाता सूची बनाने से लेकर वार्ड के रोस्टर को लेकर भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। नगर निगम का कार्यकाल 18 जून,2022 को समाप्त हो चुका है।

    सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका

    इसके बाद से ही निगम चुनाव को लेकर विवाद पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वार्डों के पुनर्सीमांकन के विरोध में पूर्व पार्षद राजीव ठाकुर व निवर्तमान पार्षद सिम्मी नंदा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें जिला प्रशासन को दोबारा इस मामले में सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। दूसरी बार भी जब प्रशासन के निर्देश याचिकाकर्ताओं ने नहीं माने तो राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

    चुनाव में पहले ही आठ माह की देरी

    नगर निगम चुनाव में पहले ही आठ माह से ज्यादा की देरी हो चुकी है। 31 जनवरी को मतदाता सूची का काम पूरा होने के बाद इसमें तेजी आने की संभावना थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के कारण इस पर फैसला नहीं हो पा रहा था। फिलहाल उपायुक्त आदित्य नेगी निगम के प्रशासक हैं।

    पूर्व सरकार ने 41 किए थे वार्ड

    वर्तमान ने फिर 34 किए नगर निगम चुनाव से पहले शहरी विकास विभाग ने वार्डों का पुनर्सीमांकन किया। इसमें 34 से बढ़ाकर 41 वार्ड कर दिए। सिम्मी नंदा और राजीव ठाकुर की याचिका पर हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को याचिकाकर्ताओं की आपत्ति सुनने के लिए कहा था।

    वर्तमान सरकार ने वार्डों की संख्या 34 की

    पिछले वर्ष छह दिसंबर को हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए काम फिर शुरू कर दिया है। वर्तमान सरकार ने अध्यादेश लाकर ने फिर से वार्डों की संख्या को 34 कर दिया है।