पालमपुर, शारदा आनंद गौतम। यदि आप घुटनों के दर्द से परेशान हैं तो अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ क्रीम की मालिश मात्र से ही दर्द छूमंतर हो जाएगा और दवा का सेवन भी नहीं करना पड़ेगा। यह संभव हुआ है हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर की बदौलत।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने तकनीक विकसित कर क्रीम तैयार की है। अब संस्थान ने तकनीक का पेटेंट करवाने के लिए औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। जल्द प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आम लोगों तक उपलब्ध होगी। हालांकि प्रयोग के तौर पर प्रदेश के कुछ बड़े स्वास्थ्य संस्थानों से आइएचबीटी ने संपर्क किया है, जहां  इसका मरीजों पर परीक्षण किया जाएगा। संस्थान में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका है। 

संस्थान के निदेशक डॉक्टर संजय कुमार बताते हैं कि प्रदेश में पाए जाने वाली जड़ी-बूटियों से क्रीम तैयार की है। यह घुटनों के दर्द से जूझने वाले लोगों के लिए कारगर औषधि होगी। अमूमन इस समस्या का सामना करने वालों को घुटनों को बदलना पड़ता है। यह एक महंगी प्रक्रिया होती है और एक उम्र के बाद इसे प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। क्रीम बनाने के लिए जो तकनीक संस्थान ने ईजाद की है, इसका लोगों को भरपूर फायदा मिलेगा।

बकौल डॉ. संजय, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा, राजीव गांधी राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय पपरोला और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क कर क्रीम का परीक्षण करने के लिए आग्रह किया है।

45 वर्ष के बाद आती है घुटनों में समस्या अमूमन 45 वर्ष की आयु के बाद लोगों में घुटनों के दर्द की शिकायत आम हो जाती है। खान-पान और दिनचर्या सही न होने से यह समस्या लोगों को बहुत परेशान करती है। दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर जटिल ऑपरेशन प्रक्रिया से जूझते हुए घुटनों को बदलना पड़ता है। हिमाचल में यह समस्या काफी गंभीर है।

 कैसे करें बचाव

अगर आप घुटने के दर्द से बचना चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें :

-लंच या डिनर से पहले तीन-चार गिलास पानी पीएं। फिर ढेर सारा सलाद खाने के बाद मेन कोर्स शुरू करें। पहले से ही आपका पेट भरा हुआ महसूस होगा और आप ओवरईटिंग से बचे रहेंगे। अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को प्रमुखता से शामिल करें।

-एनिमल फैट और उससे बनी चीजें जैसे घी, मक्खन, चीज आदि से दूर रहने की कोशिश करें। इस फैट की वजह से घुटनों की झिल्ली में सूजन, जकडऩ व दर्द पैदा हो सकता है। बेहतर यही होगा कि कुकिंग के लिए किसी वेजटेबल ऑयल का इस्तेमाल किया जाए।

-अपने भोजन में अंकुरित अनाज और फायबरयुक्त चीजों, जैसे- दलिया, सूजी और ओट्स आदि को प्रमुखता से शामिल करें।

-हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें। अपने भोजन में सोयाबीन को प्रमुखता से शामिल करें। इसमें प्राकृतिक एस्ट्रोजन होता है। इससे जोडों की सूजन भी कम होती है।

-आटे में गेहूं के साथ सोयाबीन या चना मिलवाएं। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलता है, जो मांसपेशियों के लिए भी फायदेमंद होता है।

- ज्य़ादा घी-तेल का इस्तेमाल रोकने के लिए नॉनस्टिक बर्तन का इस्तेमाल करें।

-किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करें।

-मेवों का सेवन कम करें क्योंकि इनमें मौजूद अतिरिक्त कैलरी वजन बढा सकती है।  

-चावल व आलू जैसी स्टार्चयुक्त चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें। तली-भुनी और मीठी चीजें न खाएं।

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-आर्थाराइटिस के मरीजों को अनावश्यक रूप से खडे होने व चलने से बचना चाहिए। घुटनों को जहां तक संभव हो 90 डिग्री के एंगल से ज्य़ादा न मोंडें। पालथी मारकर या उकडूं बैठने से बचें। डेढ फुट से ऊंचे स्टूल पर बैठकर ही स्नान करें। खाना भी ऊंची कुर्सी पर बैठकर ही बनाएं। सीढियां चढते-उतरते समय साइड रेलिंग का सहारा लें। घुटने पर नी कैप पहनना दर्द से राहत दिलाता है। कुछ मरीजों को नी ब्रेस पहनने की सलाह भी दी जाती है। आरामदेह फुटवेयर का चुनाव करें। रोजाना सात-आठ घंटे की नींद जरूर लें। इससे कार्टिलेज की मरम्मत में मदद मिलती है।

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Posted By: Babita kashyap

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