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    हिमाचल में इस बार बर्बाद हो सकती है सेब की फसल, मौसम में उतार-चढ़ाव ने बढ़ाई बागवानों की चिंता

    Updated: Fri, 24 Jan 2025 09:21 AM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में मौसम के उतार-चढ़ाव ने सेब बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में वृद्धि के कारण सेब के पौधों पर कोंपलें समय से पहले ही फूटने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फसल प्रभावित हो सकती है। समय से पहले कोंपलें फूटने से पौधा तनाव में आ जाता है जिससे उसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।

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    सेब की पौधों में समय से पहले कलियां खिलने का शुरुआती चरण। जागरण फोटो

    रोहित शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम के उतार-चढ़ाव ने सेब बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में वृद्धि के कारण सेब के पौधों पर कोंपलें समय से पहले ही फूटने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फसल प्रभावित हो सकती है। सामान्यत: मार्च में सेब के पौधों में कोंपले फूटने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

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    लगातार बढ़ रहा है तापमान

    इस बार मौसम विभाग के विज्ञानियों ने संभावना जताई थी कि सर्दी का सीजन लंबा रहेगा लेकिन तापमान बढ़ने से संभावनाएं क्षीण हो गई हैं। स्थिति यह है कि दोपहर के समय धूप में बैठना मुश्किल होता जा रहा है, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लगातार तापमान बढ़ रहा है।

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    कई स्थानों पर सेब के पौधों पर फूटने लगीं कोंपलें

    शिमला के ठियोग, कोटखाई व मंडी जिले के सराज, द्रंग और करसोग के निचले क्षेत्रों में कई स्थानों पर सेब के पौधों पर कोंपलें फूटने लगी हैं। वर्षा-हिमपात से तापमान में गिरावट के कारण सेब पौधों में चिलिंग आवर्स की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। कुछ दिन बाद तापमान में बढ़ोतरी से चिलिंग का क्रम टूट रहा है।

    खासकर निचले क्षेत्रों में यह समस्या अधिक आ रही है। बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो तापमान में वृद्धि होने से चिलिंग का क्रम जब टूटता है, तो जमीन से पौधों में रस का संचार होने लगता है। इसके कारण समय से पहले ही बगीचों में कोंपलें फूटने लगती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बागबान सेब के पौधों की प्रूनिंग और तौलियों से छेड़छाड़ न करें।

    समय से पहले कोंपलें फूटने से नुकसान: विशेषज्ञ

    ऐसी स्थिति सेब के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि समय से पहले कोंपलें फूटने से पौधा तनाव में आ जाएगा, जिससे उसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। पिछले सीजन के दौरान पौधे को मिले घाव आसानी से नहीं भर पाते। अंकुरित होने वाली कोंपलें भी ज्यादा देर टिक नहीं पाएंगे। ऐसी स्थिति में सेब के तौलियों से छेड़छाड़ न करें।

    तापमान में गिरावट देगी राहत

    मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट आने के आसार हैं। अगर तापमान में गिरावट आती है तो सेब का पौधा फिर से सुप्तावस्था में चला जाएगा। इससे आने वाले दिनों में चिलिंग आवर्स पूरे होने की संभावना है।

    दिन गर्म, सुबह-शाम ठंड

    प्रदेश में इन दिनों अधिकतम तापमान सामान्य से एक से आठ डिग्री तक अधिक है। दिन में धूप खिलने से गर्मी है और सुबह-शाम ठंड पड़ रही है। पहाड़ों में तापमान ज्यादा रह रहा है।

    चिलिंग आवर्स के लिए शून्य से सात डिग्री चाहिए तापमान

    सेब के पौधों के लिए 300 से 800 चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है। बागबानी विशेषज्ञों की मानें तो चिलिंग आवर्स पूरे होने के लिए औसतन तापमान शून्य से सात डिग्री होना चाहिए। इस वर्ष देखा गया है कि वर्षा व हिमपात के बाद औसतन तापमान इस श्रेणी में पहुंच गया, लेकिन कुछ दिन मौसम साफ रहने से तापमान में वृद्धि होने से क्रम टूट रहा है।

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