Himachal Weather: 58 दिनों से 6 जिला में नहीं हुई बारिश, काम बंद होने से किसान चिंतित; कल से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय
हिमाचल प्रदेश में सूखे की स्थिति गंभीर 58 दिनों से कई जिलों में बारिश नहीं। 2016 के बाद सबसे कम वर्षा दर्ज ऊना में सीजन का सबसे कम तापमान। 30 नवंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना। घना कोहरा और तापमान में गिरावट बागवानी के काम प्रभावित। इसको लेकर किसान बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।

राज्य ब्यूरो, शिमला। इस बार प्रदेश में सूखे की स्थिति बहुत लंबी हो गई है। 58 दिन से प्रदेश के छह जिलों सोलन, सिरमौर, कुल्लू, चंबा, हमीरपुर और बिलासपुर में वर्षा की बूंद तक नहीं बरसी है। अन्य जिलों में भी ऊना को छोड़कर बाकी स्थानों पर सूखे की स्थिति है। सूखे के कारण प्रदेश में केवल करीब 37 प्रतिशत क्षेत्र में रबी की फसलों की बुआई हो सकी है।
वर्ष 2016 के बाद दो माह (अक्टूबर व नवंबर) सबसे कम पांच मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। इस बार अक्टूबर और नवंबर में 0.9 मिलीमीटर वर्षा हुई है। वैसे तो प्रदेश में अक्टूबर, 2000 में वर्षा ही नहीं हुई थी, जबकि नवंबर में हुई थी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया 2016 के बाद इस बार मानसून के लौटने के बाद दूसरी सबसे कम वर्षा दर्ज की गई है।
ऊना में सीजन का सबसे कम तापमान
वीरवार को ऊना का न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि इस सीजन का अब तक का सबसे कम है। इससे पहले मंगलवार की रात को न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग के ऊना केंद्र के समन्वयक विनोद कुमार ने बताया कि न्यूनतम व अधिकतम तापमान में गिरावट आई है।
कल सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 30 नवंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है और इसका कुछ असर तीन दिसंबर तक रह सकता है। इस दौरान लाहुल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना है। बाकी स्थानों पर मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है।
श्रीवास्तव ने बताया आगामी दिनों में मंडी, बिलासपुर और ऊना सहित कई अन्य स्थानों पर घना कोहरा छा सकता है। अधिकतम तापमान में केलंग में तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है और तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
बारिश न होने से काम हुए बंद
सूखे के हालात में बागवानी के अधिकतर कार्य समय से पीछे चल रहे हैं। पौधों की प्रोनिंग का समय चल रहा है लेकिन बारिश न होने से सभी काम बंद है। पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों के लिए जरूरी कीटनाशक नमी के बाद ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बर्फबारी होने से सभी तरह के नुकसानदायक कीड़े मर जाते हैं जिसका फायदा पौधे को पहुंचता है।- राकेश चौहान, बागवान, बखोग राजगढ़।
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