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शिमला के वाइल्ड फ्लावर हॉल की लगी रिकॉर्ड तोड़ बोली, 35 साल बाद हिमाचल सरकार को मिलेंगे 2000 करोड़ रुपये

Published: Sat, 31 Oct 2026 09:45 AM (IST)

करीब 25 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शिमला के प्रतिष्ठित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल से हिमाचल सरकार के लिए कमाई का रास्ता खुल गया है।

शिमला स्थित वाइल्ड फ्लावर हाल होटल। जागरण आकाईव

शिमला स्थित वाइल्ड फ्लावर हाल होटल। जागरण आकाईव


HighLights

  1. 25 साल बाद वाइल्ड फ्लावर हॉल से कमाई शुरू

  2. हिमाचल सरकार को मिलेंगे अनुमानित 2000 करोड़

  3. ई-नीलामी से 47.1% वार्षिक राजस्व हिस्सेदारी

राज्य ब्यूरो, शिमला। करीब 25 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शिमला के प्रतिष्ठित वाइल्ड फ्लावर हाल होटल से हिमाचल सरकार के लिए कमाई का रास्ता खुल गया है। होटल के संचालन और प्रबंधन के लाइसेंस अधिकारों की प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देने की रिकॉर्ड बोली लगी है।

सरकार का दावा है कि इस तरह के सौदों में यह देश की अब तक की सबसे अधिक राजस्व हिस्सेदारी वाली बोली है। इसके आधार पर 35 साल की लाइसेंस अवधि में प्रदेश को करीब 2000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। औसतन हर महीने तीन करोड़ रुपये से अधिक सरकारी खजाने में आएंगे।

राजस्व में हर साल तीन फीसदी की बढ़ोतरी

इस सौदे में 24 करोड़ रुपये की अग्रिम लाइसेंस फीस और होटल की संपत्ति में कम से कम 50 करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। लाइसेंस अवधि के दौरान सरकार को मिलने वाले राजस्व में प्रतिवर्ष तीन प्रतिशत वृद्धि का प्रविधान है।

सरकार ने होटल संचालन के लिए प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी से संचालन एवं प्रबंधन के लाइसेंस अधिकार देने का विकल्प चुना। इससे होटल का व्यावसायिक संचालन लाइसेंसधारक करेगा जबकि होटल और उससे जुड़ी मूल परिसंपत्तियों का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा। इसे सार्वजनिक संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और प्रदेश के आर्थिक हितों की रक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या था मामला ?

ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारत में संचालित होटल वाइल्ड फ्लावर हाल 1993 में आग में क्षतिग्रस्त हो गया। सरकार ने संपत्ति को दोबारा विकसित करने के लिए निजी होटल समूहों से सहयोग लेने का फैसला किया।

साल 1995 में सरकार ने पांच सितारा डीलक्स होटल बनाने और चलाने के लिए ईआइएच के साथ संयुक्त उद्यम समझौता किया। 1998 में मतभेद बढ़ने लगे। राज्य सरकार का आरोप था कि होटल निर्धारित समयसीमा में पूरी तरह व्यावसायिक रूप से चालू नहीं किया गया और समझौते की अन्य शर्तों का भी उल्लंघन हुआ।

सरकार ने समझौता समाप्त करने के साथ होटल परिसर में कंपनी के कार्यालय को सील करने और कब्जा लेने की कार्रवाई भी की।

मामला कंपनी ला बोर्ड, मध्यस्थता और अदालतों तक पहुंचा। अंततः 2024 में होटल का कब्जा वापस लेने का रास्ता साफ हुआ और अक्टूबर 2025 में संयुक्त उद्यम कंपनी की परिसंपत्तियों पर सरकार के एकमात्र स्वामित्व से संबंधित महत्वपूर्ण फैसला आया। इसी वर्ष सर्वोच्च न्यायालय ने ईआइएच और संबंधित पक्षों को वाइल्ड फ्लावर हाल खाली करने के निर्देश दिए।

25 साल के विवाद के बाद 400 करोड़ रुपये भी मिले थे

वाइल्ड फ्लावर हाल होटल लंबे समय तक कानूनी विवाद में उलझा रहा। सर्वोच्च न्यायालय में चली न्यायिक कार्यवाही के बाद होटल की संपत्ति प्रदेश सरकार को वापस मिली।

इसके साथ ही सरकार ने होटल की भूमि, संपत्ति, संयुक्त उद्यम कंपनी और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों एवं अधिकारों पर पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण प्राप्त किया। इस प्रक्रिया में प्रदेश सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये की नकद राशि भी मिली है।

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