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    नए सत्र से पहले मर्ज होंगे हिमाचल के 550 सरकारी स्कूल, इस वजह से सरकार ने लिया फैसला

    हिमाचल प्रदेश में 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मर्ज करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार शिक्षा मंंत्री को भेजा गया है। मार्च 2025 तक स्कूलों को मर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

    By Anil Thakur Edited By: Nitish Kumar Kushwaha Updated: Thu, 26 Dec 2024 06:07 PM (IST)
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    हिमाचल में 10 से कम छात्रों की संख्या वाले स्कूल होंगे मर्ज। फाइल फोटो

    अनिल ठाकुर जागरण, शिमला। हिमाचल में 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल मर्ज किए जाएंगे। जबकि कुछ स्कूलों का दर्जा घटाया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को भेजा है। इसमें 550 के करीब स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 10 से कम छात्र संख्या है।

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    अंतिम फैसला सरकार लेगी

    इनमें 330 के करीब स्कूल ऐसे हैं, जिनको यदि मर्ज कर दिया जाता है, तो उसके 2 से ढाई किलोमीटर की दूरी पर दूसरा स्कूल है। अन्य स्कूल ऐसे हैं, जिनमें दूसरे स्कूल की दूरी दो किलोमीटर से ज्यादा है। अब इस पर अंतिम फैसला सरकार लेगी।

    सूत्रों की माने तो इस मामले को दोबारा राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। सरकार ने मार्च 2025 तक विभाग को स्कूलों को मर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, ताकि अप्रैल में शैक्षणिक सत्र के शुरू होने पर इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत डेढ़ से तीन किलोमीटर दायरे में बच्चे को स्कूल की सुविधा मिलनी चाहिए। पूर्व सरकारों के कार्यकाल में नियमों का हवाला देकर धड़ाधड़ स्कूल खोले गए। इससे स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम होती रही और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवालिया निशान उठे।

    स्कूलों का घटेगा दर्जा

    सरकार स्कूलों का दर्जा घटाने के विकल्प पर भी काम कर रही है। इसके तहत प्रारंभिक, मिडल, उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के लिए छात्र संख्या तय की गई है। प्राइमरी के लिए 10 बच्चे होना अनिवार्य है। मिडल के लिए 20, उच्च विद्यालयों के लिए 25 कम से कम छात्र संख्या होनी चाहिए। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के लिए छात्र संख्या के साथ दूसरे स्कूल में कौन-कौन से संकाय है व अन्य चीजें भी देखी जाएगी।

    यदि किसी स्कूल में इससे कम छात्र संख्या है, तो उनका दर्जा घटाया जाएगा। यानि मिडल स्कूल को प्राइमरी बनाया जाएगा। वहां पर अन्य कक्षाओं में जो बच्चें होंगे, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेज दिया जाएगा। इसी तरह उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक के लिए भी यह फार्मूला होगा।

    रिपोर्ट में बताई भौगोलिक परिस्थितियां

    विभाग ने अपनी जो रिपोर्ट सरकार को भेजी है, उसमें एक स्कूल से दूसरे स्कूल की दूरी व वहां की भौगोलिक परिस्थिति भी बताई है। कई स्कूलों के लिए रास्ता जंगल से होकर जाता है। बरसात व गर्मी में बच्चे कैसे 3 व 4 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। वहीं, पूर्व में घटी घटनाएं, जिनमें चंबा में स्कूल से घर लौटते वक्त छात्रा की ढांक से गिरने से मौत, गुड़िया केस सहित अन्य कई मामले भी सरकार के ध्यान में है।

    330 स्कूलों में एक-एक शिक्षक

    रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में 330 स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही है। हालांकि, इन स्कूलों में छात्र संख्या भी 10 से कम है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इन्हें मर्ज करने के बाद शिक्षकों का युक्तिकरण किया जाएगा ताकि दूसरे स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ हो।

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