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    Himachal News: हिमाचल में पंचायतें खर्च नहीं पाईं 800 करोड़ रुपये, सरकार ने बीस दिनों में मांगा पूरा हिसाब

    हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग नहीं हो पाया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों से इस अप्रयुक्त राशि का विवरण मांगा है। पंचायतों द्वारा खर्च की गई राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जमा नहीं किए गए हैं। विभाग ने इस राशि का विकास कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं।

    By Yadvinder Sharma Edited By: Prince Sharma Updated: Tue, 29 Apr 2025 03:30 PM (IST)
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    पंचायतें खर्च नहीं पाईं 800 करोड़ बीस दिनों में मांगा पूरा रिकार्ड

    राज्य ब्यूरो,शिमला। हिमाचल प्रदेश की पंचायतें करीब 800 करोड़ रुपए की राशि को व्यय ही नहीं कर पाई है। ऐस में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों से अप्रयुक्त की गइ राशि का पूरा ब्यौरा मांगा है।

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    यही नहीं पंचायतों द्वारा जाे राशि विकास कार्यों पर खर्च भी की गई है उसके करोडों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा ही नहींं किए गए हैं। ये राशि बीेत वित्तीय वर्ष 2024-25 की है। ऐसे में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखे गए हैं कि इस राशि का पूरा ब्यौरा दिया जाए।

    आखिर किस-किस मद में ये राशि पडी है। जिससे इस राशि का विकास में उपयोग हाे सके। ये राशि विभिन्न विकास कार्यों के लिए जिसमें कच्ची पैदम मार्ग को पक्का करना, सामुदायिक भवनों का निर्माण, कुलों आदि का निर्माण शामिल है।

    विधायक और सांसद निधि द्वारा जारी हुई थी राशि

    सूत्रों के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार पंचायतों द्वारा जो राशि व्यय नहीं की गई है। उसमें 15वें वित्त आयोग के तहत जारी राशि के अलावा विधायक निधि आर सांसद निधि के तहत जारी हुई राशि है।

    प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या 3615 थी जिनके लिए बीते वितत्तीय वर्ष मं विकास कार्यों के लिए ये राशि जारी हुई। पांच नए नगर निगम, नए नगर परिषद और और नई नगर पंचायतों के बनने के कारण 42 पंचायतें समाप्त हो गई हैं। ऐसे में वर्तमान में अब पंचायतों की संख्या 3615 से कम होकर 3577 रह गई हैं।

    पंचायतों द्वारा करीब व्यय नहीं की गई राशि को लेकर पूरा डाटा मांगा गया है। इसके अलावा जो भी विकास कार्य हुए हैं उनके उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    -राजेश शर्मा, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग