हिमाचल प्रदेश ने केंद्र से BBMB एरियर व हरित पहलों के लिए मांगी ग्रांट, 3 वजह से वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव
हिमाचल प्रदेश ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले अपनी वित्तीय मांगों को मजबूती से रखा। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
राजस्व घाटा अनुदान में वृद्धि की मांग उठाई गई।
BBMB के लंबित एरियर और प्रोजेक्ट्स वापसी की अपील।
हरित पहलों हेतु अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पर जोर।
राज्य ब्यूरो, शिमला। केंद्र सरकार के आगामी बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले शनिवार को राज्यों के साथ हुए विचार-विमर्श में हिमाचल ने अपने वित्तीय हितों को मजबूती से रखा। राज्य की ओर से तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की मौजूदा 31हजार करोड़ रुपये की राशि में वृद्धि की मांग उठाई।
दिल्ली में शनिवार को बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की, जिसमें हिमाचल का प्रतिनिधित्व राजेश धर्माणी ने किया।
इस कारण अतिरिक्त दबाव पड़ा
धर्माणी ने कहा कि 15वें वित्त आयोग में हिमाचल को मिलने वाली वित्तीय सहायता में कटौती, जीएसटी मुआवजा बंद होने और आपदा प्रभावित राज्य होने के कारण प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। ऐसे में विशेष श्रेणी राज्य रहे हिमाचल के लिए आरडीजी में बढ़ोतरी आवश्यक है।
बीबीएमबी से जुड़े मुद्दे भी उठाए
बैठक में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। उन्होंने बीबीएमबी के उन प्रोजेक्ट्स को हिमाचल को वापस दिलाने की मांग की, जिनकी करार अवधि पूरी हो चुकी है, साथ ही बीबीएमबी के लंबित एरियर के भुगतान का मामला भी केंद्र के समक्ष रखा।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में हिमाचल द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य हरित पहलों, वन संरक्षण और सतत विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन खर्च कर रहा है।
वित्त मंत्री ने दिया आश्वासन
केंद्रीय वित्त मंत्री ने राज्यों के सुझावों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि बजट निर्माण के दौरान सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। हिमाचल को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उसके वित्तीय और ऊर्जा से जुड़े अहम मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
