राज्य ब्यूरो, शिमला : आम में समय से पूर्व बौर आना नुकसानदेह नहीं है, लेकिन अब ठंड पड़ी तो आम की फसल नहीं बचेगी। अब मौसम गर्म ही रहे तो आम की सेटिंग बेहतर और फसल अच्छी होगी। इस वर्ष ठंड न पड़ने के कारण मौसम गर्म हो गया है, जिसका असर दो माह पूर्व ही आम और लीची में बौर आने के तौर पर देखा जा रहा है। लोग बौर देखकर हैरत में हैं लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो अब बौर आने के बाद परागण होना जरूरी है। इससे ही फल ज्यादा बेहतर लगते हैं, लेकिन ठंड बढ़ने की स्थिति में परागण बेहतर नहीं होगा और फल नहीं लगेंगे। ऐसी स्थिति में इसका कोई भी उपाय नहीं है और अब तो केवल मौसम पर सबकुछ निर्भर है।

बागवानी विभाग सोलन के उपनिदेशक बलवंत गुलेरिया साफ कहते हैं, जलवायु परिवर्तन का असर अब फसल और फल चक्र पर देखने को मिल रहा है। जनवरी माह बिना ठंड के ही खत्म हो गया है।' अमूमन आम में मार्च में बौर आता है। यदि ठंड बढ़ जाती है तो उस स्थिति में भी बौर आना रुक जाएगा पर बीज पौधों में आ चुका हैवहां पर ठंड बढ़ने की स्थिति में नुकसान होगा और फल नहीं लगेंगे। मौसम में दिन के समय काफी गर्मी बनी हुई है। ठंड पड़ने पर यही बौर सिकुड़ जाता है, जिससे वह धीरे-धीरे काला पड़ने लगता है और रोगग्रस्त होकर फल देने की क्षमता खो देता है। वह यह सलाह भी देते हैं कि किसी विशेषज्ञ से राय लिए बिना कीटनाशक दवाओं का छिड़काव न करें।

आम के पौधों में बौर आना एक बात है लेकिन जहां बौर के स्थान पर तीखे कोण आए हैं उसे जाचना जरूरी है। तीखे कोण सिल्ले के कारण भी होते हैं। कोण को तोड़ने पर इसके नीचे कीड़ा होता है, जो फसल को बर्बाद करता है जबकि बौर में कीड़ा नहीं होता।

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जलवायु परिवर्तन के कारण समय से पूर्व आम में बौर आया है। बौर आने के बाद उसकी सेटिंग और परागण होता है यदि ठंड बढ़ जाती है तो इस पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। अब अगर गर्मी ही बरकरार रहती है तो नुकसान नहीं होगा।

-एमएस राणा, निदेशक बागवानी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार

Posted By: Jagran