भादो माह शुरू, नवविवाहित दुल्हनों ने किया मायके का रुख
जागरण संवाददाता, शिमला : सत्रह अगस्त से भादो माह शुरू हो गया है। इस कारण शुभ कार्यो पर भी रोक लग गई
जागरण संवाददाता, शिमला : सत्रह अगस्त से भादो माह शुरू हो गया है। इस कारण शुभ कार्यो पर भी रोक लग गई है। भादों माह में शादी, मुंडन, गृह प्रवेश सहित विशेष अवसर के लिए खरीददारी शास्त्रों में निषेध मानी गई है। कारण यह है कि सभी शुभ कार्यो के साक्षी भगवान विष्णु को माना जाता है और भादो माह में भगवान विष्णु शयन के लिए जाने जाते हैं। इतना ही नहीं इस दौरान नई नवविवाहिताएं अपने ससुराल को एक माह के लिए छोड़ कर पिता की दहलीज पर चली गई हैं। भादो माह को हिमाचल प्रदेश में काला महीना भी कहा जाता है। भादो माह शुरू होते ही हिमाचल में जीवन संगिनी एक माह तक अपने पिया के लिए पराई हो जाती है। नवविवाहित दुल्हनें अपने पिया की दहलीज को छोड़ अपने बाबुल के देश चली जाएगी। यह विरह की पीड़ा उन्हें पूरे एक माह तक झेलनी होगी। पिया के घर से 17 अगस्त को रुखसत हुई दुल्हनें 17 सितंबर को ही घर वापसी करेंगी।
माना जाता है कि काले माह के दौरान सास और बहू एक-दूसरे से मुलाकात नहीं कर सकती अन्यथा दोनों के बीच हमेशा तनाव बना रहता है। इस विषय में कोई किवंदती या गाथा न जुड़ी हो, लेकिन इसका महत्व इसलिए अधिक है कि बरसात के बावजूद किसी प्रकार की मानवीय क्षति न हो और नई नवेली दुल्हन सुरक्षित रह सके, ससुराल से मायके ले जाया जाता है।
अपने प्रीतम का दीदार करने के लिए दुल्हनें आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बखूबी कर रही हैं तथा वियोग को संयोग में बदलेंगी। सुरेखा कहती है-भले ही हम मिल न पाएं, लेकिन 'हम फेसबुक, वीडियो कॉल या स्काइप या वाट्सएप के जरिए बातचीत करते रहेंगे और वियोग को महसूस नहीं होने देंगे।'
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इस माह पाताल लोक में रहते हैं विष्णु
बालमकुंद शास्त्री के अनुसार इस महीने को कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता, क्योंकि प्रत्येक शुभ कार्य को पूर्ण करने के लिए भगवान विष्णु को साक्षी माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु पाताल लोक में शयन के लिए चले जाते हैं। इस कारण इस माह कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। भादो में तंत्र मंत्र भी अधिक प्रभावशाली रहता है, जिस कारण इसे काला महीना कहा जाता है।
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