कॉलेज सरकारी, वेतन दो साल से नहीं
जागरण संवाददाता, शिमला : प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर कितनी सतर्क है। इसका खुलासा कांगड़ा जिले का बाबा
जागरण संवाददाता, शिमला : प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर कितनी सतर्क है। इसका खुलासा कांगड़ा जिले का बाबा बड़ोह कॉलेज के स्टाफ की हालत से लगता है। यहां कार्यरत स्टाफ को दो साल से वेतन ही नहीं मिला है। पांच फरवरी 2014 से पहले कॉलेज संचालन स्थानीय निजी प्रबंधन कर रहा था, लेकिन सरकार ने अधिसूचना कर कॉलेज को सरकारी दर्जा दे दिया। कॉलेज में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों को आस बंधी कि अब बेहतर सुविधाएं, अधिक स्टाफ और नए विषय पढ़ने का मौका मिलेगा। लेकिन यहां पर तैनात शिक्षकों और गैर शिक्षकों को अब हाथ फैलाने की नौबत आ चुकी है। पिछले दो सालों से वेतन ही नहीं मिल रहा है। इस वजह से 12 शिक्षकों और 10 गैर शिक्षकों को परिवार पालना मुश्किल हो गया है। स्टाफ न तो कॉलेज छोड़ सकता है, न कहीं और आवेदन कर सकता है। मगर हैरानी की बात कि सरकार और शिक्षा विभाग ने घोषणा करने के बाद भी अभी तक कोई प्रक्रिया ही नहीं बढ़ाई। ऐसे कॉलेज को सरकारी दर्जा देने का क्या फायदा जहां पर जमीनी तौर पर कोई भी काम ही न हुआ हो। पिछले दो सालों से एक भी नियमित शिक्षक की तैनाती सरकार ने नहीं की है।
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किस बात का सरकारी
दो साल से सरकारी घोषित कॉलेज की अधिसूचना को अमलीजामा हीं न पहनाया जा सके तो कैसा विभाग। जिस तरह का रवैया सरकार और शिक्षा विभाग दिखे रहे हैं, जनता की उम्मीद टूटती ही नजर आ रही है।
नहीं हुई नए स्टाफ की तैनाती..
सरकारी दर्जा मिलने के बाद कॉलेज में अभी तक ने तो किसी नियमित शिक्षक और न ही किसी गैर शिक्षक की तैनाती हुई है। सरकार केवल पूर्व स्टाफ के माध्यम से कॉलेज को चला रहा है। कोई भी सरकारी खर्च नहीं किया जा रहा है। यहां तक प्रधानाचार्य भी तैनात नहीं किया गया है। नगरोटा कॉलेज के प्रधानाचार्य को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कॉलेज में तैनात एक शिक्षक ने बताया कि दो सालों से वेतन नहीं मिला है। ऐसे परिवार कैसे चलाए?
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'दो साल हो चुके हैं। अब तक वेतन नहीं दिया गया। सरकार की ओर से कोई पत्र नहीं आया है। इसके बारे में अधिक मुझे जानकारी नहीं।'
प्रो. एसएस गिल, राजकीय महाविद्यालय नगरोटा बगवां
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