राज्य ब्यूरो, शिमला : विधानसभा में विपक्ष के वाकआउट के मुददे पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना था कि सदन से बाहर जाने का भाजपा का पेशा है। विपक्ष ऐसा पहली बार नहीं कर रहा है। भाजपा विधायकों की सोच सकारात्मक नहीं है। ये लोग जल्दी जाने का बहाना देखते हैं। विधानसभा सत्र के दौरान जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने में इनकी दिलचस्पी नहीं होती।

विधानसभा सत्र खत्म होने के बाद अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से लाए जाने वाले मामलों पर चर्चा करने में भाजपा की बिलकुल रुचि नहीं होती है। जहां तक भाजपा मुख्यालय पर घटित हिंसक घटना का सवाल है तो इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। दुनिया जानती है कि भाजपा कार्यकर्ता ही पत्थर मार रहे थे। जिस समय पथराव हुआ था, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता वहां पर नहीं थे। ऐसे में पथराव के लिए दूसरों पर दोष लगाना सही नहीं है। जो रिकार्डिग उपलब्ध है, उसमें सबने देखा है कि पथराव की शुरुआत भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने दफ्तर से की। जिस भाजपा कार्यकर्ता की आंख फूटी है, पत्थर मारने वालों में वह भी शामिल था। हैरानी इस बात की है कि सड़क पर लोहे की चेन लगाकर मार्ग को बाधित किस मकसद से किया गया था। जिस समय पथराव शुरू हुआ था, उस समय युकां कार्यकर्ता उस स्थान के पास भी नहीं थे।

एचपीसीए को बनाया परिवार की संस्था

वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) पर भाजपा ने ऐसे कब्जा कर रखा है, जैसे कि परिवार की संस्था हो। नतीजनत प्रदेश के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। एचपीसीए में लोकतांत्रिक प्रणाली को ताक पर रखा गया है। इसलिए सरकार खेलों को स्वतंत्र कराने के लिए खेल विधेयक ला सकती है। यह जरूरी नहीं है कि खेल विधेयक इसी सत्र में लाया जाता है या फिर बाद में। खेलों को एकाधिकार के चंगुल से बाहर निकालने की जरूरत है, ताकि प्रदेश में खेलों का विकास हो सके। खेल संघ स्वतंत्र होने से युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

जनता जानती है सरकार कितनी गंभीर : सुरेश भारद्वाज

विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज का कहना था सरकार चर्चा करने से भागती है। प्रदेश के लोग इस बात को जानते हैं कि कांग्रेस सरकार आम आदमी की समस्याएं दूर करने के लिए कितनी चिंतित है। किसी भी मामले में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार गंभीर नहीं है। जहां तक भाजपा के वाकआउट करने का सवाल है तो ये विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। वाकआउट का मतलब यह है कि सरकार जनता के हितों के प्रति गंभीर नहीं है। हमने विधानसभा का बायकाट नहीं किया है इसलिए कांग्रेस सरकार को समझना होगा कि जनता सरकार की कार्यशैली से खुश नहीं है।