टीबी मरीजों के नजदीकी संपर्कों को होगी जांच, दी जाएगी टीपीटी
मुकेश मेहरा मंडी क्षयरोग यानी टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए कोरोना की तरह मरीजों

मुकेश मेहरा, मंडी
क्षयरोग यानी टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए कोरोना की तरह मरीजों के स्वजन व नजदीकी संपर्कों की जांच की जा रही है। यदि मरीज के नजदीकी में कोई लक्षण पाया जाता है, तो उसे टीबी प्रिवेंटिव थैरेपी यानी टीपीटी दी जा रही है। केंद्र सरकार के आदेश पर अभियान शुरू हुआ है।
प्रदेश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत एक्टिव केसिस फाइंड अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें टीबी के लक्षणों वाले लोगों की जांच करती हैं। मंडी जिले में 1200 मरीज हैं। सक्रिय मरीज के स्वजन व अन्य नजदीकी व्यक्तियों की जांच भी टीमें कर रही हैं। इसके तहत पहले उनका छाती का एक्स-रे होता है, यदि एक्स-रे में गड़बड़ पाई जाती है, तो बलगम की जांच होती है। यदि एक्स-रे ठीक आता है तो मोंटू टेस्ट किया जाता है। अगर उसमें कुछ लक्षण दिखते हैं तो टीपीटी छह महीने के लिए शुरू की जाती है। इससे सक्रिय केस बनने से पहले ही व्यक्ति को ठीक कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से शस्त्र एप के तहत इस पर नजर रखी जाती है। अस्पताल स्टाफ की भी हो रही जांच
टीपीटी के तहत अस्पताल स्टाफ की जांच भी हो रही है। मंडी अस्पताल में सभी डाक्टर व अन्य स्टाफ की जांच हो चुकी है। फील्ड में ऐसे मरीजों की जांच करने वाले स्टाफ के भी टेस्ट हो रहे हैं। मंडी में यहां होते हैं टेस्ट
मंडी जिले में मंडी, करसोग, जोगेंद्रनगर, धर्मपुर, कटौला में ट्रूनाट टेस्ट की सुविधा है। यहां पर 15 से 20 मिनट में ही टीबी के मरीज के टेस्ट की रिपोर्ट उनको मिल जाती है। इसके अलावा बलगम की जांच 30 अस्पतालों में होती है, सीबी नाट मंडी और नेरचौक मेडिकल कालेज में होता है। टीबी के सक्रिय मामलों के नजदीक रहने वाले लोगों की जांच की जा रही है। अगर किसी में लक्षण दिखता है तो उसे टीपीटी दी जाती है। केंद्र सरकार के आदेश पर यह अभियान छेड़ा गया है।
-डा. अरिदम, क्षयरोग अधिकारी, मंडी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।