मंडी की तबाही में SDRF जवानों ने जगाई उम्मीद, 14 KM पैदल चल दो गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल; बेटी को दिया जन्म
मंडी में बारिश के बाद जंजैहली क्षेत्र के रुशाड़ और जरोह गांव में फंसी दो गर्भवती महिलाओं को एसडीआरएफ मंडी की टीम ने बचाया। रास्तों के अवरुद्ध होने के बावजूद जवानों ने 14 किलोमीटर तक पालकी में बबली देवी को पहुंचाया जिन्होंने बाद में अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया। इसी तरह मोहिनी देवी को भी सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

हंसराज सैनी, मंडी। बारिश थम चुकी थी, लेकिन आंसू नहीं। पहाड़ खामोश थे, लेकिन उनकी गोद में जन्म से पहले ही दो जिंदगियां मदद की पुकार कर रही थीं। रास्ते नहीं थे, सड़कें गुम थीं और नाले ऐसे उफान पर थे जैसे किसी ने उन्हें चेतावनी दी हो कि कोई न बचे।
पर इन्हीं मलबों, कीचड़ और टूटे रास्तों के बीच कुछ कदम उठे… चुपचाप, दृढ़… और पालकी में दो मां की ममता को कंधों पर लेकर निकल पड़े।
वीरवार की सुबह सिर्फ दो परिवारों के लिए नहीं, पूरी सराज घाटी के लिए उम्मीद लेकर आई थी। एसडीआरएफ मंडी की टीम को जब सूचना मिली कि जंजैहली क्षेत्र के रुशाड़ और जरोह गांव में दो गर्भवती महिलाएं फंसी हैं और प्रसव पीड़ा में हैं, तो उन्होंने यह नहीं देखा कि रास्ता है या नहीं, उन्होंने सिर्फ यह देखा कि अगर अब नहीं चले, तो कोई सांस रुक सकती है।
बबली ने बेटी को दिया जन्म
बबली देवी पत्नी ज्ञान चंद जब पालकी में बैठी थीं, तो उनकी आंखों में दर्द के साथ भरोसे का एक सागर था। 14 किलोमीटर तक एसडीआरएफ के जवानों ने बारी-बारी से पालकी को कंधों पर उठाया। सड़क तक पहुंचने के बाद उन्हें मंडी के जोनल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां बबली ने बेटी को जन्म दिया।
जवानों की हर तरफ हो रही तारीफ
मोहिनी देवी पत्नी देशराज को भी उसी तरह लाया गया। बारिश की चिकनाहट से फिसलती पगडंडियों पर एसडीआरएफ की पकड़ सिर्फ जूतों की नहीं थी, वह थी संकल्प की। मोहिनी को नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया, जहां वह अब सुरक्षित हैं। उसकी प्रसव की तिथि 10 जुलाई थी।
एसडीआरएफ के पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ने जवानों की इस नेक कार्य के लिए पीठ थपथपाई है।
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