अब मंडी व धर्मशाला में भी होगी डीएनए जांच
हंसराज सैनी मंडी डीएनए (डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक एसिड) की जांच के लिए एजेंसियों को अब शि

हंसराज सैनी, मंडी
डीएनए (डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक एसिड) की जांच के लिए एजेंसियों को अब शिमला के चक्टर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही रिपोर्ट के लिए कई दिन का इंतजार करना होगा। हिमाचल में अब मंडी व धर्मशाला की क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भी डीएनए की होगी। क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला मंडी में करीब ढाई करोड़ से स्थापित डीएनए परीक्षण प्रयोगशाला का मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शुक्रवार को शुभारंभ करेंगे। इस दौरान वह डीएनए ब्लॉक भवन की आधारशिला भी रखेंगे।
डीएनए प्रयोगशाला में स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। करीब डेढ़ साल से स्टाफ को शिमला की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में प्रशिक्षण दिया जा रहा था। प्रदेश में हर साल करीब 500 सैंपल डीएनए जांच के लिए शिमला की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में आते हैं। एक सैंपल की जांच में दो से तीन दिन का समय लगता है। डीएनए जांच को कानूनी मान्यता मिलने के बाद इसका महत्व और बढ़ गया है। संगीन अपराधों जैसे दुष्कर्म व हत्या आदि मामलों में एजेंसियां डीएनए जांच को ज्यादा तवज्जो दे रही हैं। इससे शिमला की प्रयोगशाला पर काम का बोझ बढ़ गया था। जांच रिपोर्ट समय पर न मिलने से आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने में कई बार देरी हो रही थी। एक टेस्ट पर करीब आठ से 10 हजार रुपये खर्च आता है। प्रयोगशाला शुरू होने से अब पांच जिलों मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति, बिलासपुर व हमीरपुर के डीएनए सैंपल की जांच मंडी में होगी।
धर्मशाला में डीएनए परीक्षण प्रयोगशाला तैयार हो चुकी है। फॉरेंसिक साइंस विभाग ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से इसके शुभारंभ के लिए समय मांगा है। तीनों प्रयोगशालाओं में अगले साल से वन्य प्राणियों के डीएनए जांच की सुविधा भी शुरू हो जाएगी। इससे पशुपालन विभाग की दिक्कतें भी कम होंगी।
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प्रदेश में अब मंडी व धर्मशाला में भी डीएनए जांच होगी। इसके लिए दोनों क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में ढाई-ढाई करोड़ से प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
-अरुण शर्मा, निदेशक फॉरेंसिक साइंस विभाग हिमाचल।
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