Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Kullu Landslide: स्कूल भवन की छत को चीरते हुए कमरे में पहुंची चट्टान, 31 बच्चे आते हैं शिक्षण संस्थान में

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 06:23 PM (IST)

    Himachal Pradesh Landslide कुल्लू के गड़सा घाटी स्थित आशानी गांव में भूस्खलन से एक सरकारी स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गया। रविवार होने से कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन 31 बच्चों की शिक्षा खतरे में पड़ गई है। पहाड़ी से गिरी चट्टान ने स्कूल की छत और दीवारों को नुकसान पहुंचाया। प्रशासन को सूचित कर दिया गया है और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई है।

    Hero Image
    गड़सा घाटी के आशनी स्कूल भवन पर गिरी चट्टान।

    संवाद सहयोगी, कुल्लू। Himachal Pradesh Landslide, जिला कुल्लू की गड़सा घाटी के आशानी गांव में राजकीय प्राथमिक स्कूल आशानी का भवन पहाड़ी से चट्टान के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत यह रही कि रविवार का दिन हाेने के कारण स्कूल व इसके आसपास कोई मौजूद नहीं था। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    स्कूल के ऊपरी छोर की पहाड़ी से पहले छोटे-छोटे पत्थर गिरने लगे। फिर अचानक एक बड़ी चट्टान स्कूल की छत पर आ गिरी और छत को चीरते हुए भवन के अंदर जा घुसी।

    इस कारण स्कूल भवन की दीवार ढह गई, वहीं छत भी क्षतिग्रस्त हो गई है। चट्टान गिरने से भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कमरे के अंदर रखी कुर्सियां, मेज व अन्य जरूरी सामान को भी नुकसान हुआ है।

    16 बच्चे पढ़ते हैं पहली से पांचवीं तक

    भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण बच्चों की पढ़ाई व्यवस्था पर संकट आ गया है। इस स्कूल में पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के 16 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अब इस स्थान पर अब बच्चों को पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि पहाड़ी से दोबारा पत्थर गिर सकते हैं।

    आंगनबाड़ी केंद्र में भी आते हैं 15 बच्चे

    तीन कमरों वाले इस स्कूल भवन में जहां पहली से लेकर पांचवीं तक 16 बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते थे तो वहीं इसी भवन के एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र में चलाया जाता है, जिसमें लगभग 15 नौनिहाल आते थे। रविवार होने के कारण स्कूल बंद था अन्यथा पर बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। कुल 31 बच्चे इस शिक्षण संस्थान में पढ़ने आते हैं। 

    2012 में भी हुआ था भूस्खलन

    गौरतलब है कि इससे पहले 2012 में भी भूस्खलन होने के कारण पहाड़ी से पत्थर गिरे थे। हालांकि उस समय स्कूल भवन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था, लेकिन रविवार को भारी बारिश के कारण पहाड़ी से चट्टान खिसक गई और इस चट्टान ने स्कूल भवन को क्षतिग्रस्त कर दिया।

    यह भी पढ़ें- Himachal Rain: हिमाचल में अगस्त में सामान्य से 72 प्रतिशत अधिक वर्षा ने मचाई तबाही, ऊना में टूटे सारे रिकॉर्ड

    प्रशासन व विभाग को किया सूचित

    सूचना मिलते ही हमने स्कूल भवन का मौका किया। पहाड़ी से चट्टान गिरने के कारण स्कूल की छत व दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसकी सूचना हमने प्रशासन सहित शिक्षा विभाग को दे दी है। वहीं अब बच्चों को यहां बैठना खतरे से खाली नहीं है। इनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाई जानी उचित है ताकि बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें।

    - केहर सिंह, अध्यक्ष, स्कूल प्रबंधन समिति। 

    यह भी पढ़ें- 'मणिमहेश झील की तरफ से आया सैलाब देख कांप गई रूह' ...हड़सर में लंगर का मिटा नामोनिशान, श्रद्धालुओं ने सुनाई आपबीती