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    Vikram Batra Death Anniversary: इस शूरवीर के जिक्र के बिना अधूरी है कारगिल की कहानी, जैसा नाम, वैसे ही थे वीर

    By Rajesh SharmaEdited By:
    Updated: Tue, 07 Jul 2020 02:07 PM (IST)

    Vikram Batra Death Anniversary जैसा नाम वैसे ही वीर थे विक्रम जिन्होंने जान की परवाह न करते हुए कारगिल युद्ध में शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया।

    Vikram Batra Death Anniversary: इस शूरवीर के जिक्र के बिना अधूरी है कारगिल की कहानी, जैसा नाम, वैसे ही थे वीर

    धर्मशाला, ऋचा राणा। सच कहते हैं कि वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो छोटी सी उम्र में ऐसे बड़े काम कर जाते हैं कि इतिहास के पन्नों में उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो जाता है। इनमें से कुछ लोगों का जिक्र जब भी होता है, तो आंखें नम हो जाती हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो देश के लिए प्राण न्योछावर करने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसे ही भारत माता के वीरसपूत थे कैप्टन विक्रम बत्रा। जैसा नाम वैसे ही वीर थे विक्रम, जिन्होंने जान की परवाह न करते हुए कारगिल युद्ध में शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया।

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    पराक्रम भी ऐसा दिखाया कि आज कारगिल की कहानी इस शूरवीर के जिक्र के बिना अधूरी है। लेफ्टिनेंट व्रिकम बत्रा को युद्ध में वीरता और शौर्य का परिचय देने के लिए देश के सर्वाच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था।

    माता-पिता बोले- हमारे दिल में हमेशा जिंदा

    विक्रम बत्रा का जन्म गिरधारी लाल शर्मा और कमल कांता शर्मा के घर पर नौ सिंतबर 1974 को हुआ। उनके माता- पिता कहते हैं कि विक्रम मरे नहीं उनके दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे।  

    सेना में जाना था जुनून

    22 साल की उम्र में जहां लोग जिंदगी को एक दिशा देने का प्रयास कर रहे होते हैं, वहीं पर विक्रम की नियुक्ति बहुत कम उम्र में बतौर लेफ्ट‍िनेंट हो गई थी, भारतीय सेना में जाने के लिए उन्होंने मर्चेंट नेवी की नौकरी तक ज्वाइन नहीं की, हालांकि उसमें वेतन ज्यादा था।

    तिरंगे के पीछे या तिरंगे में लिपटकर आऊंगा

    विक्रम बत्रा अपनी मां को पहला गुरु मानते थे, उन्होंने कारगिल युद्ध में जाने से पहले अपनी मां को कहा था कि मां तुम्हारा बेटा या तो लहराते हुए तिरंगे के पीछे आएगा या फिर उसमें लिपटकर।

    विक्रम के लिए आज भी नहीं लगाई हाथों में मेहंदी

    विक्रम बत्रा जब कॉलेज में पढ़ते थे तो उन दिनों उनकी जिंदगी में एक लड़की आई थी। व्रिकम इस लड़की से शादी करने वाले थे और उनसे वादा किया था कि कारगिल युद्ध से वापस आकर ही शादी कर लेंगे। लेकिन वो वीर जवान वापस आया तो तिरंगे में लिपटकर, उनकी प्रेमिका आज भी व्रिकम को भूला नहीं पाई हैं और आज तक उन्होंने शादी नहीं की।