नगरोटा सूरियां, जेएनएन। पठानकोट-जोगेंद्रनगर ट्रैक पर रेलगाड़ियों के बहाल होने में अभी कुछ समय लग सकता है। हालांकि तलाड़ा रेलवे स्टेशन के पास व गुलेर से रानीताल के बीच पड़े मलबे को हटा लिया गया है और वीरवार को इंजन भेजकर पासिंग की मंजूरी भी मिल गई थी लेकिन इंजन न आने से लोग मायूस हुए। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 15 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर विभाग रेलगाड़ियां बहाल कर जोखिम नहीं उठाना चाहता है।

अगर 15 के बाद मौसम साफ रहेगा तो ही रेल सेवा बहाल होगी। 26 जून से रेल सेवा बंद होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही रोजाना अप-डाउन करने वाले कर्मचारियों, व्यापारियों व स्कूली बच्चों को सात गुणा बस किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत गुलेर स्टेशन से ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन के बीच आने वाले 12 गांवों के बाशिंदों को परेशानी हो रही है। इन गांवों के लोग सड़क सुविधा से भी वंचित हैं। हालात ये हैं कि बरसात में कोई बीमार हो जाए तो 14 किलोमीटर तक पहाड़ी रास्ते से मरीज को पालकी में डालकर सड़क तक लाना पड़ता है।

ये गांव हैं खासे प्रभावित गुलेर से ज्वालामुखी रोड तक धार, टल्ला, मदराटा, हाली बस्ती, चतरा, धंगड़, बिलासपुर, सकरी, त्रिप्पल, बासा मेहवा व भटेड़ गांवों की करीब दस हजार आबादी रेलगाड़ियां बंद होने से खासे प्रभावित है। सड़क न होने से रेलगाड़ियां ही यहां यातायात का एकमात्र साधन है। धार पंचायत के उपप्रधान नितिन ठाकुर ने बताया कि सड़क न होने व बरसात में रेलगाड़ियां बंद होने के कारण चतरा व लुणसू गावों के 54 परिवार पलायन कर चुके हैं। गावों के लिए गुलेर से धंगड़ वाया लुणसू धार 14 किमी सड़क का निर्माण 40 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन आजतक कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

'ट्रैक पर जगह-जगह पड़ा मलबा हटा लिया है। वीरवार को इंजन चलाकर ट्रैक का निरीक्षण कर रेलगाड़िया बहाल की जानी थी। 15 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी के कारण निरीक्षण रोक दिया है। विभाग ट्रैक पर किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता है। मौसम साफ होते ही रेलगाड़ियां बहाल की जाएंगी।'

-हरीश कटोच, ट्रैक निरीक्षण इंजीनियर, रेलवे स्टेशन पालमपुर