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Exclusive Interview: 'एक भारत श्रेष्ठ भारत कहने वाले खींच रहे विभाजन की लकीरें', पढ़िए Anand Sharma का बेबाक इंटरव्यू

हिमाचल प्रदेश (Himachal News) के कांगड़ा संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार ने दैनिक जागरण को दिए इंटरव्यू में भाजपा पर एक के बाद एक कई हमले किए। आनंद शर्मा ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत कहने वाले विभाजन की लकीरें खींच रहे हैं। प्रधानमंत्री वाराणसी से हेमा मालिनी मथुरा से लड़ सकती हैं तो मैं हिमाचल का हूं चुनाव क्यों नहीं लड़ सकता? पढ़ें पूरा साक्षात्कार।

By Jagran News Edited By: Monu Kumar Jha Published: Fri, 17 May 2024 05:00 AM (IST)Updated: Fri, 17 May 2024 05:00 AM (IST)
Himachal News: एक भारत श्रेष्ठ भारत कहने वाले खींच रहे विभाजन की लकीरें-आनंद शर्मा

दिनेश कटोच, कांगड़ा। पहली बार लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) लड़ रहे आनंद शर्मा का कहना है कि इस बार देश में हो रहा लोकसभा का चुनाव, एक बांटने वाली और एक समावेशी विकास वाली विचारधारा के बीच हो रहा है, इसलिए विश्व की नजर भारत के चुनाव पर है। तीन बार हिमाचल प्रदेश और एक बार राजस्थान से राज्यसभा सदस्य रहे आनंद शर्मा हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं।

मनमोहन सिंह सरकार में विदेश, वाणिज्य, उद्योग और कपड़ा मंत्री रहे आनंद शर्मा ने 1982 में शिमला से विधानसभा चुनाव भाजपा के बड़े नेता दौलत राम चौहान के विरुद्ध लड़ा और हारे थे। 51 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और 71 वर्ष की आयु में वह लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

आनंद का कहना है कि 10 साल देश पर राज करने वाली भाजपा जनता को हिसाब नहीं दे पा रही है। 2014 के बाद ही देश मजबूत हुआ है, ऐसा कहने वाले अब बलिदानियों का अपमान भी कर रहे हैं। चुनाव प्रचार में व्यस्त कांगड़ा संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शर्मा (Kangra Lok Sabha seat Anand Sharma) के साथ दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता दिनेश कटोच ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश :

सवाल: करीब ढाई दशक राज्यसभा में रहने के बाद अब लोकसभा चुनाव...वह भी कांगड़ा से। उम्र के इस पड़ाव में चुनाव कहीं यह संदेश तो नहीं कि कांग्रेस के पास अगली पीढ़ी के लिए कोई नेता ही नहीं?

जवाब: (हंसते हुए) राज्यसभा का दौर अलग था, पार्टी के आदेश थे। अब चुनाव लड़ना पार्टी का आदेश है। उम्र के इस पड़ाव की जहां तक बात है, मैं प्रधानमंत्री से तीन वर्ष छोटा हूं, चुनाव क्यों नहीं लड़ सकता? देश में कहीं से कोई भी राष्ट्रीय नेता चुनाव लड़ सकता है। मैं तो अपने ही राज्य में चुनाव लड़ रहा हूं।

दु:खद यह है कि नए-पुराने, धरतीपुत्र-बाहरी वाली विभाजन की लकीरें एक भारत श्रेष्ठ भारत की बात करने वाले खींच रहे हैं। मेरा वर्षों से संगठन व पार्टी में योगदान रहा है। पार्टी ने दायित्व मुझे सौंपा है जिसे पूरा करने में जुटा हूं। हमें तो कोई आपत्ति नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) वाराणसी से, हेमामालिनी (Hema Malini) मथुरा से, स्मृति ईरानी अमेठी से लड़ें। कांग्रेस में न नेताओं की कमी है, न कार्यकर्ताओं की।

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सवाल: जातिगत जनगणना पर आपकी राय पार्टी स्टैंड से अलग थी। आपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र भी लिखा था। 2010 में भी आपने इसका विरोध किया था। अब आपका क्या मत है?

जवाब: देखिए किसी भी विषय पर किसी भी निर्णय के संबंध में कई मत हो सकते हैं। सबकी अपनी-अपनी राय हो सकती है। लेकिन किसी भी दी गई राय को लेकर संगठन में चर्चा होती है और फिर आम सहमति से कोई निर्णय लिया जाता है।

हर किसी को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। मैं समझता हूं कि आम सहमति से लिया गया कोई भी निर्णय देश के संचालन में भी आवश्यक है और सभी को मान्य भी।

ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी अब पहले वाली कांग्रेस नहीं रही। इसमें कहीं बिखराव है या नेतृत्व का अभाव। क्यों कांग्रेस को अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ना पड़ रहा है?

पार्टी में न तो कोई बिखराव है और न ही नेतृत्व का अभाव। पार्टी में निरंतर नए लोग शामिल होते हैं। केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने 10 साल का कोई हिसाब नहीं दिया है।

आइएनडीआइए के मंच से चुनाव लड़ना भाजपा को घेरने की रणनीति के अंतर्गत है। इसमें नेतृत्व अभाव वाली कोई बात नहीं है। भाजपा के चार सौ पार नारे की हवा अभी तक तीन चरणों में हो चुके चुनावों में निकल चुकी है।

सवाल: आपके पास प्रचार को लेकर बहुत कम दिन हैं। बड़े नेताओं की रैलियां होंगी। सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी जाना होगा। आपको नहीं लगता कि टिकट देने में देरी हुई ?

जवाब: इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। टिकट में देरी वाली कोई बात नहीं है। प्रचार में समय की कमी उसके लिए है जो संसदीय क्षेत्र के लिए कोई नया चेहरा हो। मुझे इस संसदीय क्षेत्र में सभी लोग जानते हैं। 2014 व 2019 में चाहे चुनावी हवा भाजपा के पक्ष में रही हो। लेकिन इस बार हवा का रुख दूसरा है।

संगठन ने मुझे जिम्मेवारी सौंपी है यह मेरा सौभाग्य है। कई दशकों से राजनीति में काम किया है। संसदीय क्षेत्र में सभी मेरे परिचित हैं। दिन में चार से पांच सभाएं हो रही हैं। चंबा का दौरा पूरा किया गया है। अब कांगड़ा में हूं।

सवाल: आप विदेश मंत्री भी रहे हैं, मोदी सरकार की विदेश नीति को कैसे देखते हैं?

जवाब: देखिए, भारत एक बड़ा देश है। विदेश नीति राष्ट्रीय सहमति पर ही निर्भर होती है। लेकिन आज हालात यह हैं कि चीन अपनी आंख दिखाता है। पाकिस्तान के साथ तनाव है। देश की रक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता है, लेकिन आपसी बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।

किसी पर दोषारोपण जरूरी नहीं है। बड़ी बात है तो यह है कि हमारे पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते अच्छे होने चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है मगर हमें अपने आसपास की बड़ी शक्तियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सवाल: आप केंद्र में मंत्री रहे हैं, हिमाचल के लिए क्या किया ?

जवाब: एक केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की ही नहीं, प्रदेश की सेवा भी है। हिमाचल प्रदेश को भी बहुत कुछ दिया है। दिलचस्प यह है कि इसमें भी जिला कांगड़ा को ही अधिकतर बड़ी परियोजनाएं मिलीं। कांगड़ा में राष्ट्रीय फैशन तकनीकी संस्थान (निफ्ट), पालमपुर में टी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय, जिला कांगड़ा के कंदरोडी व ऊना के पंडोगा में औद्योगिक क्षेत्र, मंडी में आइआइटी दिया गया। इसके अलावा कई योजनाएं विकास को लेकर भी रहीं।

सवाल: जो भाजपा में गए उन्हें तो कांग्रेस बिकाऊ कह रही है, क्या भाजपा से कांग्रेस में जाने वाले बिकाऊ नहीं हैं?

जवाब: सच यह है कि भाजपा ने राजनीतिक लांडरी सक्रिय कर रखी है। इस मशीन में बार-बार नेताओं को बदला जा रहा है। दल बदल तो दोनों ही तरफ से हुआ है पर भाजपा में गए लोग बिके हैं, जबकि कांग्रेस में तो पार्टी से दूर हुए लोगों की ही घर वापसी हुई है।

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