कोटला, जेएनएन। कोरोनाकाल में सोशल मीडिया, फेसबुक व यूट्यूब ऐसे प्रमुख प्लेटफार्म रहे जिनसे देश की बड़ी आबादी जुड़ी हुई है। मौजूदा वक्त में हर वर्ग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है तथा अगर आपने गौर किया हो तो लॉकडाउन के बीच और उसके बाद से ही सोशल मीडिया फेसबुक पर अश्लील चित्र, वीडियो की भरमार ही हो गई है। दरअसल फेसबुक का वीडियो वाला विंडो ओपन करते ही अश्लील वीडियो व चित्र दिखने लगते हैं जिनको देखकर शर्मिंदगी भी महसूस होती है।

सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त अश्लील सामग्री ग्राहकों पर जबरदस्ती थोपी जा रही है। अश्लीलता भी इस किस्म की होती है कि कई बार परिवार के साथ बैठे भी अपने आपको शर्मिंदा होना पड़ता है। फेसबुक यूजरो की मानें तो लाइक, फालो व शेयर करने के बिना ही अश्लील सामग्री प्रस्तुत हो जाती है। सोशल मीडिया पर परोसी जाने वाली अश्लीलता से किशोरों के मन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

कोरोनाकाल में पढ़ाई की आड़ में यह सब कुछ आम हो गया है। पढ़ने- लिखने और कैरियर बनाने की उम्र में ही बच्चे अश्लील सामग्री की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बच्चों में अश्लील सामग्री का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है तथा स्थिति बहुत गंभीर होती जा रही है। समय की मांग यही है कि सोशल मीडिया से अश्लील सामग्री को पूर्णता प्रतिबंधित किया जाए। इस गंदगी के खिलाफ समाज को भी उसे नकारने के लिए आगे आना होगा। ऐसे वीडियो या फोटो को देखते ही उसकी रिपोर्ट फेसबुक को करें ताकि फेसबुक इसका प्रसारण बंद करने पर मजबूर हो।

समाज पर पड़ रहा विपरीत असर, सरकार लगवाए प्रतिबंध

इस बारे में बुद्धिजीवी नरेंद्र कुमार, धनीराम, राजकुमार, जीवन कुमार, राकेश कुमार  आदि ने कहा कि सोशल मीडिया पर परोसी जा रही अश्लीलता से समाज का युवा वर्ग पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस अश्लीलता पर सरकार को प्रतिबंध लगवाना होगा अन्यथा आने वाली पीढ़ी पर इसका असर दिखेगा। उन्होंने कहा कि इस पर केंद्र सरकार को भी दखल देना होगा और तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाने के प्रभावी उपायों पर विचार करना चाहिएताकि बच्चों पर ऑनलाइन शिक्षा के दौरान इसका बुरा प्रभाव न पड़े।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से फैलाई जा रही अश्लीलता पर केंद्र सरकार को प्रतिबंध लगवाना होगा अन्यथा इस अश्लीलता से आने वाले समय में किसी के सामने फोन चलाने से भी परहेज करना पड़ेगा।

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