मंडी, जागरण टीम। Narendra Modi Visit Bijli Mahadev, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच अक्टूबर को दशहरा उत्सव में भाग लेने के साथ बिजली महादेव भी जाएंगे। नरेन्‍द्र मोदी 25 साल के बाद कुल्‍लू की पहाड़‍ियों पर बने इस खूबसूरत मंदिर में जाएंगे और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेंगे। मोदी पांच अक्‍टूबर को हिमाचल के दौरे पर आ रहे हैं। पहले वह बिलासपुर में एम्‍स सहित अन्‍य परियोजनाओं की सौगात देंगे। इसके अलावा कुल्‍लू आएंगे। कुल्‍लू के अंतरराष्‍ट्रीय दशहरा उत्‍सव में भी मोदी के शामिल होने की संभावना है।

बिजली महादेव मंदिर व हेलीपैड को जोड़ने के लिए वन विभाग ने 800 मीटर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है पीएम मोदी हेलीकाप्‍टर से बिजली महादेव पहुंचेंगे व इसके बाद भुंतर एयरपोर्ट जाएंगे। यहां से कुल्‍लू के अंतरराष्‍ट्रीय दशहरा उत्‍सव में जाएंगे। प्रशासन को बिजली महादेव में हेलीपैड बनाने में तीन दिन का समय लगेगा। बिजली महादेव मंदिर को हेलीपैड से जोड़ने के लिए वन विभाग व प्रशासन ने सड़क निर्माण लगभग पूरा कर लिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच अक्टूबर को कुल्लू के बिजली महादेव के दर्शन करेंगे। मोदी करीब 24 साल बाद बिजली महादेव मंदिर जाएंगे। इससे पहले वह 1997 में बिजली महादेव गए थे। उस समय वह हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे। मंदिर से करीब 800 मीटर की दूरी पर हेलीपैड बनाया जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए भूमि चिन्हित कर ली है। हेलीपैड के निर्माण में तीन दिन लगेंगे। वन विभाग ने हेलीपैड व मंदिर को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। सड़क पर अब सोलिंग की जा रही है। मोदी यहां वायुसेना के हेलिकाप्टर से पहुंचेंगे।

कई बार किया बिजली महादेव का जिक्र

पीएम मोदी हिमाचल प्रदेश के दौरों के दौरान अपने भाषण में कई बार बिजली महादेव का जिक्र कर चुके हैं। अब चुनावी वर्ष में जब मोदी का कुल्‍लू दौरा तय हुआ है तो वह बिजली महादेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन पीएम के दौरे की तैयारियों में जुट गया है।

बिजली महादेव का है खास इतिहास व मान्‍यता

इस मंदिर में शिवलिंग पर हर 12 साल के बाद आसमानी बिजली गिरती है। यह मंदिर हिमाचल के कुल्लू में स्थित है। महादेव के इस अनोखे मंदिर का नाम 'बिजली महादेव मंदिर' है। शिवजी का यह अनोखा मंदिर ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास ही एक पहाड़ पर बना हुआ है। कहा जाता है की यहां आसमानी बिजली गिरने की वजह से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। लेकिन मंदिर के पुजारी जब शिवलिंग को मक्खन से जोड़ते हैं, तो यह फिर से अपने पुराने रूप में आ जाता है। गांव के लोगों का कहना है की यहां बिजली गिरने से जानमाल का नुकसान होता है। लेकिन भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी कृपा दृष्टि से बिजली के आघात को वे सहन कर लेते हैं।

यह रहेगा कार्यक्रम

मंदिर में दर्शन करने के बाद वह भुंतर हवाई अड्डे से सड़क मार्ग से ढालपुर मैदान जाएंगे। वहां अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के शुभारंभ पर निकले वाली भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में भाग लेंगे।  यहां देवी देवताओं के दर्शन करेंगे। इसके बाद सड़क मार्ग से वापस भुंतर हवाई अड्डे जाएंगे। वहां से वापस चंडीगढ़ के लिए रवाना होंगे।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट