मैं मनोहर सिंह हूं नाटक के मंचन के साथ गेयटी थियेटर फेस्टिवल का समापन
गेयटी थियेटर फेस्टिवल के तहत अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग व एमेच्योर ड्रामेटिक एसोसिएशन शिमला के तत्वावधान में तीन दिवसीय नाट््य समारोह का समापन नाटक मैं मनोहर सिंह हूं के शानदार मंचन के साथ हुआ।

शिमला, जागरण संवाददाता। गेयटी थियेटर फेस्टिवल के तहत अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग व एमेच्योर ड्रामेटिक एसोसिएशन शिमला के तत्वावधान में तीन दिवसीय नाट््य समारोह का समापन नाटक 'मैं मनोहर सिंह हूं के शानदार मंचन के साथ हुआ। नाटक में शिमला के साधारण से युवा की असाधारण अभिनेता बनने की दास्तां को बड़े ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया।
नाटक में अभिनय को देखकर गेयटी सभागार दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। मनोहर सिंह की अभिनय पद्धति, अभिनीत किए जाने वाले चरित्र को आत्मसात करने की तैयारी, उनके समकक्ष अभिनेत्रियों सुरेखा सिकरी व उत्तरा बावरकर की चरित्र निर्माण की विधि भी नाटक में चर्चित रही। मनोहर सिंह के चर्चित नाटकों आधे अधूरे, लुक बैंक इन एंगर, संध्या छाया, ओथेलो, किंग लीयर, तुगलक, दांतों की मौत व हिम्मत माई का रेफरेंस भी नजर आया। करियर के एक पड़ाव में थियेटर, सिनेमा और धारावाहिकों में समन्वय स्थापित करते करते कैंसर से लंबी जद्दोजहद के बाद इस दुनिया से अलविदा के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।
नाटक के लेखक व निर्देशक केहर सिंह ठाकुर ने 'मैं मनोहर सिंह हूं में किरदार को बखूबी निभाया है। आलोक, वस्त्र व सेट परिकल्पना मीनाक्षी, प्रकाश संचालन ममता, पाश्र्व ध्वनि संचालन आरती ठाकुर, रेवत राम विक्की, बैक ग्राउंड म्यूजिक प्रबंधन वैभव ठाकुर की रही। संकल्प रंगमंडल शिमला के अध्यक्ष केदार ठाकुर ने कहा कि गेयटी थियेटर फेस्टिवल को सफल बनाने के लिए प्रदेश की नाट््य संस्था संकल्प रंगमंडल शिमला ने नैतिकता से अनुकृति रंगमंडल कानपुर को स्थानीय सहयोग प्रदान किया। संकल्प रंगमंडल शिमला ने विशेष रूप से गेयटी थियेटर फेस्टिवल के लिए हर रंगमंचीय विभाग के लिए अपने प्रतिनिधि नियुक्त किए थे, जिनमें नरेश कुमार मिनचा, लोकेश लक्की, प्रीतिका नौटियाल व नीरज ठाकुर शामिल हुए।
कोरोना महामारी के दौरान गेयटी थियेटर वीरान था लेकिन अब यहां के ऐतिहासिक मंच पर रौनक लौटने लगी है। कोविड महामारी के पश्चात भाषा संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश की सक्रिय भागीदारी से बेहतर संभावनाएं बनी है, जो एक स्वस्थ रंगमंच के सकारात्मक विकास को बढ़ावा देती है।
रंगकर्मियों की सरकार से मांग
रंगमंच से जुड़े कलाकारों की राज्य सरकारों से मांग रही है कि उन्हें सुविधाएं व सम्मान दें। रंगकर्मियों की बुरी स्थिति के बारे में सवाल उठाए हैं। फिल्मों और धारावाहिकों में पलायन को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं। रंगकर्मियों को उचित मान-सम्मान व उचित मानदेय न मिलने के कारण उन्हें अपने शौक रंगकर्म को छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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