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    जानिए कौन हैं हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, बंडारू दत्तात्रेय का लेंगे स्‍थान

    By Richa RanaEdited By:
    Updated: Tue, 06 Jul 2021 05:30 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर गोवा की राजनीति का अहम चेहरा हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर का आरंभ करने वाले आर्लेकर न केवल गोवा में विधायक रहे हैं अपितु उन्होंने मंत्री के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

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    हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर गोवा की राजनीति का अहम चेहरा हैं।

    शिमला, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर गोवा की राजनीति का अहम चेहरा हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर का आरंभ करने वाले आर्लेकर न केवल गोवा में विधायक रहे हैं अपितु उन्होंने मंत्री के रूप में भी सेवाएं दी हैं। आर्लेकर गोवा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे हैं।

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    गोवा विधानसभा को बनाया था पेपरलेस

    राजेंद्र आर्लेकर गोवा विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं। गोवा विधानसभा को पेपरलेस बनाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। इधर हिमाचल प्रदेश में भी ई विधान लागू है यानी हिमाचल प्रदेश विधानसभा भी पेपरलेस है। दूसरा दिलचस्प तथ्य यह है कि राजेंद्र आर्लेकर गोवा में पर्यावरण एवं वन मंत्री रहे हैं। अब यकीनन उन्हें हरियाली के जाने जाते हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बन कर अच्छा ही लगेगा।

    ट्वीट के माध्यम से जताया नेताओं का आभार

    राजेंद्र आर्लेकर ने एक ट्वीट के माध्यम से राष्ट्रपति और आला नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी शुरुआत पार्टी कार्यकर्ता के रूप में की थी। फिर वह विधायक बने, गोवा में मंत्री बने और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी। अब वह एक राज्यपाल हैं। इससे भाजपा के नेताओं और नेतृत्व के महत्व का पता चलता है। पार्टी नेताओं ने मुझ पर विश्वास व्यक्त किया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष ने मुझ पर विश्वास किया है। भाजपा वह दल है जो विश्वास करता है।

    बंडारू दत्तात्रेय का लेंगे स्थान

    हिमाचल प्रदेश में नौकरशाही, सेना, पुलिस सेवाओं और राजनीति से जुड़ी हस्तियां ही राज्यपाल रही हैं। राजेंद्र आर्लेकर से पूर्व बंडारू दत्तात्रेय हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे। वह अब हरियाणा के राज्यपाल होंगे। उनसे पूर्व आचार्य देवव्रत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे जो अब गुजरात के राज्यपाल हैं। जहां आचार्य देवव्रत का आग्रह शून्य बजट प्राकृतिक खेती के लिए रहता था और वह सरकारी अधिकारियों से निरंतर संवादरत रहते थे वहीं बंडारू दत्तात्रेय लेखन को समर्पित रहते थे और समाज के हर उस व्यक्ति तक प्रशस्ति पत्र पहुंचाते थे जो सकारात्मक कार्य कर रहा हो।